Edited By Rahul Singh,Updated: 17 Oct, 2026 12:56 PM

विरोध-प्रदर्शनों के कारण कारोबार में आ रही परेशानियों को देखते हुए व्यापारी संगठनों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है। इसमें सड़क पर होने वाले ऐसे विरोध-प्रदर्शनों से प्रभावित स्वरोजगार करने वाले व्यापारियों के लिए तत्काल कानूनी सुरक्षा...
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों का असर अब कारोबार पर भी पड़ने लगा है। त्योहारों के सीजन से पहले व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली में व्यापार प्रभावित होने के कारण बेंगलुरु समेत दूसरे शहरों के व्यापारियों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कारोबारियों का कहना है कि प्रदर्शन और बाजारों में कामकाज प्रभावित होने से ऑर्डर समय पर पूरे करना मुश्किल हो रहा है। इससे दशहरा और दीपावली के दौरान कारोबार सामान्य रहने को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
बेंगलुरु के कपड़ा कारोबार पर भी असर
बेंगलुरु होलसेल क्लॉथ मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रकाश पिरगल ने कहा कि दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों का असर बेंगलुरु के कपड़ा कारोबार पर भी पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि बेंगलुरु के व्यापारी दिल्ली में कपड़ा भेजते हैं, लेकिन वहां के कारोबारियों ने फिलहाल और कपड़ा भेजने से मना किया है। पिरगल के मुताबिक, दिल्ली के व्यापारियों का कहना है कि विरोध-प्रदर्शनों के कारण शहर में कारोबार प्रभावित है और हालात ऐसे हैं, जैसे पूरा शहर बंद हो। इस वजह से बेंगलुरु के व्यापारी भी अपने पहले से मिले ऑर्डर समय पर पूरे नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान कारोबार सामान्य रूप से चल पाएगा या नहीं, इसे लेकर व्यापारियों में अनिश्चितता है। अगर उनके कारोबार पर इतना असर पड़ा है, तो संभव है कि हजारों दूसरे व्यापारियों को भी ऐसी ही परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हो।
मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र
विरोध-प्रदर्शनों के कारण कारोबार में आ रही परेशानियों को देखते हुए व्यापारी संगठनों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है। इसमें सड़क पर होने वाले ऐसे विरोध-प्रदर्शनों से प्रभावित स्वरोजगार करने वाले व्यापारियों के लिए तत्काल कानूनी सुरक्षा देने की मांग की गई है। व्यापारी संगठनों का कहना है कि सड़कों पर बार-बार होने वाले प्रदर्शनों और रास्ते बंद होने से व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं। इसका असर न केवल स्थानीय कारोबारियों, बल्कि दूसरे शहरों से जुड़े व्यापार पर भी पड़ता है।
शहर के केंद्र से बाहर हों प्रदर्शन
प्रकाश पिरगल ने कहा कि बेंगलुरु में विरोध-प्रदर्शनों के लिए फ्रीडम पार्क निर्धारित किया गया है। इसके बावजूद शहर के अलग-अलग हिस्सों में अक्सर प्रदर्शन होते रहते हैं। उनके अनुसार, महीने में 15 से 20 दिन तक विरोध-प्रदर्शन होने से आम लोगों और कारोबारियों को परेशानी उठानी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि जब शहर के बीचों-बीच प्रदर्शन होते हैं और सड़कें जाम हो जाती हैं, तो लोगों को दफ्तर पहुंचने में देरी होती है। यहां तक कि अदालत जाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। पिरगल ने मांग की कि विरोध-प्रदर्शनों को शहर के केंद्र से बाहर आयोजित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के लिए तय स्थानों का इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही, संबंधित अधिकारी और संगठन बातचीत के जरिए भी अपनी समस्याओं का समाधान निकाल सकते हैं। त्योहारी सीजन को देखते हुए व्यापारियों की चिंता है कि अगर विरोध-प्रदर्शनों के कारण बाजार और परिवहन व्यवस्था प्रभावित होती रही, तो इसका असर बिक्री, माल की आपूर्ति और समय पर ऑर्डर पूरे करने पर पड़ सकता है।