भारत विश्व शांति के लिए अपनी भूमिका पूरी ईमानदारी से निभाने का प्रयास कर रहा: प्रधानमंत्री मोदी

Edited By Updated: 01 Nov, 2025 01:37 PM

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत विश्व शांति के लिए अपनी भूमिका पूरी ईमानदारी से निभाने का प्रयास कर रहा है, आज पूरी दुनिया में कहीं भी कोई भी संकट आता है, कोई आपदा आती है तो भारत एक भरोसेमंद साथी के तौर पर मदद के लिए आगे आता है।...

नेशनल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत विश्व शांति के लिए अपनी भूमिका पूरी ईमानदारी से निभाने का प्रयास कर रहा है, आज पूरी दुनिया में कहीं भी कोई भी संकट आता है, कोई आपदा आती है तो भारत एक भरोसेमंद साथी के तौर पर मदद के लिए आगे आता है। प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को नवा रायपुर में नवनिर्मित ब्रह्माकुमारी संस्थान का भव्य शांति शिखर रिट्रीट सेंटर ‘एकेडमी फॉर ए पीसफुल वर्ल्ड' को समाज के नाम समर्पित किया। उन्होंने इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘वैश्विक शांति के मिशन में जितनी अहमियत विचारों की होती है उतनी ही बड़ी भूमिका व्यावहारिक नीतियों और प्रयासों की भी होती है।

भारत इस दिशा में आज अपनी भूमिका पूरी ईमानदारी से निभाने का प्रयास कर रहा है। आज पूरी दुनिया में कहीं भी कोई भी संकट आता है, कोई आपदा आती है तो भारत एक भरोसेमंद साथी के तौर पर मदद के लिए आगे आता है और तुरंत पहुंचता है।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘आज पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों के बीच भारत पूरे विश्व में प्रकृति संरक्षण की प्रमुख आवाज बना हुआ है। बहुत आवश्यक है कि हमें प्रकृति ने जो दिया है हम उसका संरक्षण करें, उसका संवर्धन करें और यह तभी होगा जब हम प्रकृति के साथ मिलकर जीना सीखेंगे।''

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे शास्त्रों ने प्रजापिता ने यही सिखाया है। हम नदियों को मां मानते हैं, हम जल को देवता मानते हैं, हम पौधे में परमात्मा के दर्शन करते हैं। इसी भाव से प्रकृति और उसके संसाधनों का उपयोग करते हैं। प्रकृति से केवल लेने का भाव नहीं बल्कि उसे लौटने की सोच भी होनी चाहिए, आज यही जीवन जीने का तरीका दुनिया को सुरक्षित भविष्य का भरोसा देता है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अभी से भविष्य के प्रति अपनी इन जिम्मेदारियों को समझ भी रहा है और उन्हें निभा भी रहा है। ‘वन सन, वन वर्ड, वन ग्रिड' जैसी भारत की पहल, ‘वन अर्थ-वन फैमिली-वन फ्यूचर' जैसे भारत के दृष्टिकोण से आज दुनिया जुड़ रही है।

उन्होंने कहा कि भारत ने भू-राजनीतिक सीमा से अलग मानव मात्र के लिए ‘मिशन लाइफ' भी शुरू किया है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘समाज को निरंतर सशक्त करने में ब्रह्मकुमारीज जैसी संस्थाओं की अहम भूमिका है। मुझे विश्वास है शांति शिखर जैसे संस्थान भारत के प्रयासों को नयी ऊर्जा देंगे और इस संस्थान से निकली ऊर्जा देश और दुनिया के लाखों करोड़ों लोगों को विश्व शांति के विचार से जोड़ेगी।'' प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस की बधाई दी और कहा, ‘‘आज छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना के 25 साल पूरी कर रहा है। छत्तीसगढ़ के साथ झारखंड और उत्तराखंड की स्थापना के भी 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं। आज देश के और भी कई राज्य अपना स्थापना दिवस मना रहे हैं।

मैं इन सभी राज्यों के निवासियों को स्थापना दिवस की बहुत-बहुत बधाई देता हूं।'' उन्होंने कहा, ‘‘राज्य के विकास से देश का विकास, इसी मंत्र पर चलते हुए हम भारत को विकसित बनाने के अभियान में जुटे हैं। विकसित भारत की इस यात्रा में ब्रह्मकुमारीज जैसी संस्था की बहुत बड़ी भूमिका है। मेरा सौभाग्य रहा है कि मैं बीते कई दशकों से आप सबके साथ जुड़ा हुआ हूं। मैं यहां अतिथि नहीं हूं मैं आप ही का हूं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे यहां हर धार्मिक अनुष्ठान जिस उद्घोष के साथ पूरा होता है वह उद्घोष है, ‘विश्व का कल्याण हो, प्राणियों में सद्भावना हो'। ऐसी उदार सोच, ऐसा उदार चिंतन और विश्व कल्याण की भावना का आस्था से ऐसा संगम, यह हमारी सभ्यता, हमारी परंपरा का सहज स्वभाव है।

उन्होंने विश्वास जताया कि शांति शिखर जैसे संस्थान भारत के प्रयासों को नयी ऊर्जा देंगे। कार्यक्रम के दौरान विशिष्ट अतिथि के रूप में राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद रहे। वहीं संस्थान की ओर से अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी जयंती दीदी और अतिरिक्त महासचिव डॉक्टर राजयोगी बीके मृत्युंजय भाई भी मौजूद थे।

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