Edited By Parveen Kumar,Updated: 26 Mar, 2026 07:09 PM

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध की आशंकाओं के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। करीब 6 साल बाद भारत ने ईरान से एलपीजी (रसोई गैस) खरीदने का फैसला किया है, जिसे मौजूदा हालात में बेहद अहम माना जा रहा है।
नेशनल डेस्क : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध की आशंकाओं के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। करीब 6 साल बाद भारत ने ईरान से एलपीजी (रसोई गैस) खरीदने का फैसला किया है, जिसे मौजूदा हालात में बेहद अहम माना जा रहा है।
चीन जाने वाला जहाज अब भारत आएगा
सूत्रों के मुताबिक, ईरान से आने वाला यह एलपीजी कार्गो पहले चीन भेजा जाना था, लेकिन भारत ने रणनीतिक बातचीत के जरिए इसे अपनी ओर मोड़ लिया। यह जहाज जल्द ही मंगलुरु पोर्ट पहुंचेगा। इसके बाद इस गैस को देश की तीन बड़ी सरकारी कंपनियों- इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के बीच बांटा जाएगा।
रुपये में होगा भुगतान, डॉलर पर निर्भरता कम
इस डील की सबसे खास बात यह है कि भारत इस गैस का भुगतान डॉलर में नहीं बल्कि भारतीय रुपये में करेगा। इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रुपये की ताकत भी बढ़ेगी। साथ ही ईरान के साथ रुपये में व्यापार शुरू होना कूटनीतिक रूप से भी भारत के लिए फायदेमंद माना जा रहा है।
भारत की गैस जरूरत और मिडिल ईस्ट पर निर्भरता
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक देश है और अपनी जरूरत का करीब 60% गैस विदेशों से मंगाता है। पिछले साल की कुल खपत का बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आया था। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के चलते सप्लाई प्रभावित हो रही थी, और ईरान से सीधी खरीद भारत के लिए राहत साबित हो सकती है।
क्या सस्ता होगा गैस सिलेंडर?
ईरान से गैस मंगाना भारत के लिए सस्ता पड़ सकता है, क्योंकि दूरी कम है और भुगतान भी रुपये में हो रहा है। अगर आने वाले समय में ईरान से आयात बढ़ता है, तो तेल कंपनियों की लागत घट सकती है। इसका फायदा आगे चलकर आम लोगों को सस्ते गैस सिलेंडर के रूप में मिल सकता है।