दुनिया की इकोनॉमी में भारत का दबदबा, 165 देशों की GDP से बड़ा हो गया सालाना बजट

Edited By Updated: 01 Feb, 2026 05:49 PM

india s annual budget has become larger than the gdp of 165 countries

भारत अब सिर्फ उभरती अर्थव्यवस्था नहीं रहा, बल्कि ग्लोबल इकोनॉमिक पावर बनने की रफ्तार में तेजी से आगे बढ़ चुका है। इसका सबसे बड़ा संकेत देश का ताज़ा केंद्रीय बजट है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार 53.5 लाख करोड़ रुपये (करीब 583.5 अरब डॉलर) के...

नेशनल डेस्क : भारत अब सिर्फ उभरती अर्थव्यवस्था नहीं रहा, बल्कि ग्लोबल इकोनॉमिक पावर बनने की रफ्तार में तेजी से आगे बढ़ चुका है। इसका सबसे बड़ा संकेत देश का ताज़ा केंद्रीय बजट है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बार 53.5 लाख करोड़ रुपये (करीब 583.5 अरब डॉलर) के बजट का ऐलान किया है। यह आंकड़ा इतना बड़ा है कि दुनिया के 165 देशों की पूरी सालाना GDP भी इसके आसपास नहीं ठहरती।

पहली बार 50 लाख करोड़ का आंकड़ा पार

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश किया गया यह बजट ऐतिहासिक माना जा रहा है. ऐसा पहली बार हुआ है जब देश का कुल बजट 50 लाख करोड़ रुपये की सीमा से ऊपर पहुंचा है। पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 50 लाख करोड़ से नीचे था। 

अगर बीते वर्षों पर नजर डालें तो

  • 2022 में बजट 39.45 लाख करोड़ रुपये था
  • 2023 में यह बढ़कर 45 लाख करोड़ हुआ
  • 2025 में बजट 48.21 लाख करोड़ रुपये रहा
  • और अब 2027 के लिए 53.5 लाख करोड़ रुपये

यह साफ दिखाता है कि सरकारी खर्च में हर साल बड़ा उछाल देखने को मिला है।

मोदी सरकार के 13 बजट, खर्च में तीन गुना बढ़ोतरी

मोदी सरकार के कार्यकाल का यह 13वां पूर्ण बजट है। 2014 में जब पहली बार पूर्ण बजट पेश हुआ था, तब कुल बजट आकार सिर्फ 17.95 लाख करोड़ रुपये था। अब यह आंकड़ा तीन गुना से ज्यादा बढ़ चुका है। सरल शब्दों में कहें तो पिछले एक दशक में सरकार का कुल खर्च करीब 200 फीसदी बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भी बजट का आकार और बड़ा हो सकता है।

बजट के अहम आर्थिक आंकड़े

सरकार की ओर से पेश आंकड़ों के मुताबिक-

  • कुल खर्च 53.5 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है
  • नॉन-डेट रिसिप्ट्स 36.5 लाख करोड़ रुपये
  • केंद्र की नेट टैक्स आय 28.7 लाख करोड़ रुपये
  • ग्रॉस मार्केट उधारी 17.2 लाख करोड़ रुपये
  • नेट मार्केट उधारी 11.7 लाख करोड़ रुपये
  • पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) करीब 11 लाख करोड़ रुपये रहने की उम्मीद

वहीं वित्त वर्ष 2026-27 में फिस्कल डेफिसिट GDP का 4.3 फीसदी अनुमानित किया गया है, जो पिछले अनुमान से थोड़ा कम है।

कर्ज के मोर्चे पर भी सुधरते आंकड़े

सरकार के अनुमान के मुताबिक डेट-टू-GDP रेश्यो 2026-27 में घटकर 55.6 फीसदी रह सकता है, जबकि 2025-26 में यह 56.1 फीसदी था। यह संकेत देता है कि खर्च बढ़ने के बावजूद सरकार कर्ज नियंत्रण की दिशा में संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रही है।

सिंगापुर और UAE से भी बड़ा भारत का बजट

दिलचस्प बात यह है कि भारत का सालाना बजट अब दुनिया की 27वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था सिंगापुर की GDP (करीब 574 अरब डॉलर) से भी ज्यादा है। इतना ही नहीं, 28वें स्थान पर मौजूद UAE की GDP (569 अरब डॉलर) भी भारत के बजट से कम है। यानी भारत का बजट अब कई विकसित और तेल-समृद्ध देशों की पूरी अर्थव्यवस्था से आगे निकल चुका है।

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