Edited By Anu Malhotra,Updated: 27 Jan, 2026 11:51 AM

भारत जल्द ही यूरोपीय संघ (EU) के 27 देशों की कारों पर टैरिफ में बड़ी कटौती करने वाला है। वर्तमान में यह टैरिफ 110% है, जिसे पहले 40% तक घटाया जाएगा और भविष्य में इसे 10% तक लाया जा सकता है। इस कदम से Volkswagen, Mercedes-Benz और BMW जैसी कंपनियों के...
नेशनल डेस्क: भारत जल्द ही यूरोपीय संघ (EU) के 27 देशों की कारों पर टैरिफ में बड़ी कटौती करने वाला है। वर्तमान में यह टैरिफ 110% है, जिसे पहले 40% तक घटाया जाएगा और भविष्य में इसे 10% तक लाया जा सकता है। इस कदम से Volkswagen, Mercedes-Benz और BMW जैसी कंपनियों के लिए भारत में कारोबार करना आसान हो जाएगा। ट्रेड डील 27 जनवरी को साइन होने वाली है, जिसे दोनों पक्ष ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कह रहे हैं। इस समझौते से भारत का EU के साथ व्यापारिक अधिशेष 2031 तक 51 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है।
इस कदम के पीछे अमेरिका की टैरिफ धमकियां भी एक कारण मानी जा रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ यूरोपीय देशों के खिलाफ 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इसके अलावा, ट्रंप ग्रीनलैंड पर नियंत्रण चाहते हैं, लेकिन कई यूरोपीय देश इसका विरोध कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार यूरोपीय यूनियन के साथ इस ट्रेड डील पर अंतिम रूप देने के लिए तैयार है। हालांकि यह जानकारी गोपनीय है और आखिरी समय में इसमें बदलाव संभव हैं। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय और यूरोपीय कमीशन ने इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार किया है।
इस समझौते को 27 जनवरी, 2026 को भारत और EU के बीच साइन किया जाएगा। इसे दोनों पक्ष ‘Mother of All Deals’ कह रहे हैं। इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से अनुमान है कि भारत और EU के बीच व्यापारिक संतुलन 2031 तक 51 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच यह समझौता करीब एक दशक पहले शुरू हुआ था। हालांकि, हाल की वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितताओं के कारण इसे तेजी से आगे बढ़ाया गया।
MK ग्लोबल की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, EU के साथ व्यापक मुक्त व्यापार समझौता भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकता है। इससे वित्त वर्ष 2031 तक भारत का EU के साथ व्यापारिक अधिशेष 50 अरब डॉलर से अधिक बढ़ सकता है। वर्तमान में भारत का EU के कुल निर्यात में हिस्सा 17.3 प्रतिशत है, जो इस समझौते के बाद 22-23 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। हालांकि, EU के बाजार में भारत की हिस्सेदारी अभी केवल 0.8 प्रतिशत है, लेकिन यह समझौता दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।