Edited By Radhika,Updated: 11 Aug, 2026 12:34 PM

भारत के राजनीतिक इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन और लोकतांत्रिक यात्रा को दुर्लभ कलाकृतियों, तस्वीरों, पुस्तकों, प्रिंट्स, फिल्म पब्लिसिटी आर्ट और ऐतिहासिक स्मृतियों के माध्यम से प्रस्तुत करने वाली प्रदर्शनी ‘स्वराज: रीविज़ुअलाइज़िंग इंडियाज़ पॉलिटिकल...
नेशनल डेस्क: भारत के राजनीतिक इतिहास, स्वतंत्रता आंदोलन और लोकतांत्रिक यात्रा को दुर्लभ कलाकृतियों, तस्वीरों, पुस्तकों, प्रिंट्स, फिल्म पब्लिसिटी आर्ट और ऐतिहासिक स्मृतियों के माध्यम से प्रस्तुत करने वाली प्रदर्शनी ‘स्वराज: रीविज़ुअलाइज़िंग इंडियाज़ पॉलिटिकल हिस्ट्री’ का आयोजन नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में किया जा रहा है। द तुली रिसर्च सेंटर फॉर इंडिया स्टडीज (T.R.I.S.) की ओर से आयोजित इस प्रदर्शनी को संस्था के संस्थापक नेविल तुली ने क्यूरेट किया है। प्रदर्शनी का प्रीव्यू 12 अगस्त 2026 को शाम 6 बजे विजुअल आर्ट्स गैलरी, इंडिया हैबिटेट सेंटर में होगा। यह प्रदर्शनी 16 अगस्त 2026 तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक दर्शकों के लिए खुली रहेगी। प्रदर्शनी में प्रवेश निशुल्क है।
1857 से आधुनिक भारत तक की राजनीतिक यात्रा
‘स्वराज’ में भारत के राजनीतिक इतिहास को केवल प्रमुख घटनाओं के क्रम के रूप में नहीं, बल्कि तस्वीरों, कला, मीडिया, सिनेमा और ऐतिहासिक वस्तुओं के जरिए देखने का प्रयास किया गया है। प्रदर्शनी की शुरुआत भारत के शुरुआती यूरोपीय तटीय दृश्यों और बंगाल पुनर्जागरण की बौद्धिक चेतना से होती है, जिसके बाद 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम और स्वतंत्रता आंदोलन के विभिन्न चरणों को सामने रखा गया है।
प्रदर्शनी में भारतीय प्रिंटिंग प्रेस के विकास, राजनीतिक प्रचार, फोटो जर्नलिज्म, सिनेमा, ‘भारत माता’, ‘मदर इंडिया’ और बदलते तिरंगे जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है। महात्मा गांधी को एक राजनीतिक नेता के साथ-साथ ऐसी ऐतिहासिक छवि और विचार के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसने व्यापक जनसमुदाय को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक व्यक्तित्वों की मौजूदगी
प्रदर्शनी में स्वामी विवेकानंद, दादाभाई नौरोजी, टैगोर परिवार, बाल गंगाधर तिलक, रास बिहारी बोस, एनी बेसेंट, सी. राजगोपालाचारी, जवाहरलाल नेहरू और नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित कई प्रमुख व्यक्तित्वों से संबंधित सामग्री को जगह दी गई है। हालांकि, प्रदर्शनी को केवल स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय गौरव की कहानी तक सीमित नहीं रखा गया है। इसमें भारत के विभाजन, संविधान निर्माण, रियासतों के एकीकरण, आपातकाल, युद्ध, सांप्रदायिक तनाव और विभिन्न विरोध प्रदर्शनों एवं जन आंदोलनों जैसे जटिल और संवेदनशील अध्यायों को भी शामिल किया गया है।
‘स्वराज’ में मीडिया और फोटो जर्नलिज्म के जरिए इतिहास को दर्ज करने की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया है। प्रदर्शनी में 1858 में फेलिस बीटो द्वारा खींची गई तस्वीरों, महात्मा गांधी के जीवन के अंतिम दिनों की हेनरी कार्टियर-ब्रेसों की तस्वीरों तथा 1980 और 1990 के दशकों की हिंसा और आंदोलनों से जुड़ी रॉयटर्स के फोटो जर्नलिस्टों द्वारा दर्ज की गई तस्वीरों को शामिल किया गया है।
प्रदर्शनी में अखबारों, जर्नल और पत्रिकाओं के जरिए यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि मीडिया ने अलग-अलग दौर में देश की राजनीतिक और सामाजिक घटनाओं को किस तरह दर्ज किया।
कला के जरिए सामाजिक और राजनीतिक बदलावों की अभिव्यक्ति
प्रदर्शनी में कई महत्वपूर्ण कलाकारों की कृतियां भी शामिल हैं। इनमें चित्तप्रसाद, गोवर्धन आश, रामकिंकर बैज, कमरुल हसन, सोमनाथ खोसा, अल्ताफ, प्रकाश कर्मकार, विवान सुंदरम और सुधीर पटवर्धन से जुड़ी कलाकृतियां शामिल हैं।
इन कृतियों के माध्यम से सामाजिक असमानता, राजनीतिक संघर्ष, हिंसा, अन्याय और बदलते भारतीय समाज की विभिन्न तस्वीरों को सामने लाने का प्रयास किया गया है।
छोटी वस्तुओं में भी दर्ज है इतिहास
प्रदर्शनी की एक खास विशेषता ऐतिहासिक दौर से जुड़ी छोटी-छोटी वस्तुओं का प्रदर्शन है। इसमें लगभग 1921 के माचिस के डिब्बों के टिन कवर शामिल हैं, जिन पर स्वदेशी नेताओं के नाम गलत तरीके से छपे हुए हैं।
इसके अलावा रामेंद्रनाथ चक्रवर्ती की ‘गांधीजी एट दांडी’, चित्तप्रसाद की 1942 की ‘क्विट इंडिया’, मदन महत्ता आर्काइव्स की तस्वीरें और गीगी स्कारिया की ‘हू डिविएटेड फर्स्ट?’ जैसी कृतियां भी प्रदर्शित की जाएंगी।
युवाओं से इतिहास का संवाद
प्रदर्शनी का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी को भारत के राजनीतिक इतिहास से जोड़ना भी है। ‘स्वराज’ के माध्यम से स्वतंत्रता, पहचान, न्याय, लोकतंत्र और सामाजिक बदलाव जैसे सवालों को वर्तमान पीढ़ी के संदर्भ में देखने का प्रयास किया गया है। प्रदर्शनी का समापन ‘गांधीजी इन कंटेम्परेरी इंडिया’ खंड के साथ होता है। यह हिस्सा दर्शकों को आज के भारत में गांधी की प्रासंगिकता, असहमति, लोकतंत्र और बदलती राष्ट्रीय पहचान जैसे मुद्दों पर विचार करने का अवसर देता है। आयोजकों के अनुसार, ‘स्वराज’ का उद्देश्य केवल अतीत को प्रदर्शित करना नहीं, बल्कि इतिहास को वर्तमान से जोड़ना है। प्रदर्शनी इस सवाल के साथ दर्शकों को छोड़ती है कि एक राष्ट्र अपने अतीत से क्या याद रखता है, क्या भूल जाता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए क्या विरासत के रूप में आगे ले जाता है।