गारंटीड रिटर्न वालों के लिए खुशखबरी, सुकन्या समृद्धि, PPF-NSC-पोस्ट और ऑफिस FD पर सरकार का बड़ा ऐलान

Edited By Updated: 05 Jan, 2026 08:32 AM

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महंगाई, बाजार की उठापटक और ब्याज दरों में संभावित बदलाव की आशंकाओं के बीच सरकार ने उन निवेशकों को बड़ी राहत दी है, जो सुरक्षित और भरोसेमंद योजनाओं पर भरोसा करते हैं. केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि जनवरी से मार्च 2026 तक की तिमाही के लिए पब्लिक...

नेशनल डेस्क: महंगाई, बाजार की उठापटक और ब्याज दरों में संभावित बदलाव की आशंकाओं के बीच सरकार ने उन निवेशकों को बड़ी राहत दी है, जो सुरक्षित और भरोसेमंद योजनाओं पर भरोसा करते हैं. केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि जनवरी से मार्च 2026 तक की तिमाही के लिए पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY), नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC) और पोस्ट ऑफिस की फिक्स्ड डिपॉजिट समेत सभी छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.

रेपो रेट में कटौती के बाद बढ़ी थी चिंता

पिछले एक साल में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में कुल 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती किए जाने के बाद यह कयास लगाए जा रहे थे कि सरकार स्मॉल सेविंग स्कीम्स पर मिलने वाले ब्याज को घटा सकती है. आमतौर पर रेपो रेट में बदलाव का असर इन योजनाओं की ब्याज दरों पर भी देखने को मिलता है. इसी वजह से निवेशकों में असमंजस बना हुआ था.

सरकार का स्पष्ट संदेश: ब्याज दरें यथावत

वित्त मंत्रालय के ताजा फैसले ने इन सभी आशंकाओं पर विराम लगा दिया है. मंत्रालय ने कहा है कि मौजूदा तिमाही में PPF, सुकन्या समृद्धि योजना, NSC, किसान विकास पत्र (KVP) और पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट जैसी सभी योजनाओं की ब्याज दरें पहले जैसी ही रहेंगी. इससे खासकर मध्यम वर्ग, वरिष्ठ नागरिकों और रिटायरमेंट की योजना बना रहे लोगों को स्थिर आय का भरोसा मिला है.

मौजूदा ब्याज दरें क्या कहती हैं

फिलहाल पब्लिक प्रोविडेंट फंड पर 7.1 प्रतिशत, सुकन्या समृद्धि योजना पर 8.2 प्रतिशत, नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट पर 7.7 प्रतिशत और पोस्ट ऑफिस एफडी पर अवधि के हिसाब से करीब 6.9 से 7.5 प्रतिशत तक ब्याज दिया जा रहा है. इन दरों के बरकरार रहने से निवेशकों की मासिक और वार्षिक आय पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा.

 विशेषज्ञों का मानना है कि जब शेयर बाजार और अन्य निवेश विकल्पों में उतार-चढ़ाव बना रहता है, तब छोटी बचत योजनाएं लोगों के लिए सुरक्षा कवच का काम करती हैं. सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब लोग जोखिम से बचते हुए स्थिर और भरोसेमंद निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं.

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