डॉलर के मुकाबले क्या आ रही है नई BRICS करेंसी? विदेश मंत्रालय ने स्थिति की साफ

Edited By Updated: 13 Sep, 2026 12:53 AM

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भारत में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान 'न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन' को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया है। शिखर सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों के बीच सीमा पार भुगतानों को अधिक तेज, सस्ता और पारदर्शी बनाने का आह्वान किया गया। इसके...

नई दिल्ली: भारत में आयोजित 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान 'न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन' को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया है। शिखर सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों के बीच सीमा पार भुगतानों को अधिक तेज, सस्ता और पारदर्शी बनाने का आह्वान किया गया। इसके साथ ही यह चर्चा भी तेज हो गई थी कि क्या अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ब्रिक्स अपनी नई साझा मुद्रा लाने जा रहा है। इस पर विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, फिलहाल ब्रिक्स की कोई साझा मुद्रा (Common Currency) शुरू करने का प्रस्ताव नहीं है। विदेश मंत्रालय में सचिव (आर्थिक संबंध) सुधाकर दलेला ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में ब्रिक्स के भीतर किसी साझा मुद्रा को लेकर कोई औपचारिक प्रस्ताव मौजूद नहीं है। उन्होंने बताया कि स्थानीय मुद्राओं में व्यापार निपटान का विषय नया नहीं है और इस पर पिछले एक दशक से अधिक समय से चर्चा चल रही है।

लोकल करेंसी से व्यापार होगा आसान और सस्ता

विदेश मंत्रालय के अनुसार, ब्रिक्स देशों के बीच चर्चा का मुख्य उद्देश्य साझा मुद्रा बनाना नहीं, बल्कि अंतर-ब्रिक्स व्यापार को बढ़ाना, भुगतान प्रणालियों को बेहतर बनाना और कारोबारियों के लिए लेनदेन लागत कम करना है। सुधाकर दलेला ने कहा कि लोकल करेंसी में व्यापार करने से द्विपक्षीय लेनदेन की लागत कम होगी और यह वैश्विक भुगतान व्यवस्था के पूरक के रूप में कार्य करेगा। इसका उद्देश्य मौजूदा ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम का विकल्प तैयार करना नहीं, बल्कि व्यापार को अधिक सुविधाजनक और प्रभावी बनाना है। इस संबंध में वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों के स्तर पर भी लगातार अध्ययन और विचार-विमर्श जारी है।

भारत की अध्यक्षता में 350 से अधिक बैठकें और बड़ी उपलब्धियां

भारत की अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स सहयोग में अभूतपूर्व प्रगति देखने को मिली। देश के 30 से अधिक शहरों में 350 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं। सुधाकर दलेला ने बताया कि भारत की अध्यक्षता में चार प्रमुख स्तंभों के तहत लगभग 150 व्यावहारिक परिणाम हासिल किए गए हैं। इनमें खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, इनोवेशन, सतत विकास और ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताएं शामिल हैं। इसके अलावा एमएसएमई सहयोग पोर्टल, लॉजिस्टिक्स फ्रेमवर्क, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और स्टार्टअप सहयोग जैसी पहलें प्रमुख उपलब्धियों के रूप में सामने आई हैं।

एकतरफा शुल्क और टैरिफ पर जताई चिंता

सर्वसम्मति से अपनाए गए 'नई दिल्ली घोषणा पत्र 2026' में एकतरफा शुल्क (टैरिफ) और नॉन-टैरिफ बैरियर पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। ब्रिक्स सदस्य देशों ने कहा कि ऐसी नीतियां वैश्विक व्यापार को प्रभावित करती हैं और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के अनुरूप नहीं हैं।

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