इजराइल के आम चुनाव में विदेशी दखल; कतर पर अरब वोटर्स को पैसे देने का आरोप, खुफिया एजेंसी मोसाद करेगी जांच

Edited By Updated: 31 Oct, 2026 11:59 AM

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इजराइल चुनाव में विदेशी दखल के आरोपों की जांच मोसाद और शिन बेट करेंगी। कतर पर अरब मतदाताओं को पैसे देने का आरोप है। अरब पार्टियों ने 19 सीटें जीती हैं। चुनाव के बाद सरकार गठन को लेकर खींचतान तेज है और नेतन्याहू के लिए बहुमत जुटाना चुनौती बन गया है।

Jerusalem:  इजराइल में मंगलवार को हुए आम चुनाव के बाद विदेशी दखल के आरोपों ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। न्यूज चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव में कथित विदेशी हस्तक्षेप की जांच मोसाद और शिन बेट करेंगी। आरोप है कि कतर और कुछ अन्य देशों ने अरब मतदाताओं को पैसे देकर अधिक मतदान कराने की कोशिश की। इस चुनाव में अरब पार्टियों ने 19 सीटें जीतकर अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पार्टी के नेताओं ने भी अरब पार्टियों पर चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। हालांकि, केंद्रीय चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि जांच सीमित दायरे में होगी और इसका चुनाव परिणामों पर कोई असर नहीं पड़ा है।

 

अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने पर मतभेद
चुनाव के बाद इजराइल में सरकार गठन को लेकर भी खींचतान शुरू हो गई है। डेमोक्रेट्स पार्टी के प्रमुख यायर गोलान ने विपक्षी दलों से अरब पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाने की अपील की है। उनका कहना है कि 19 सीटों को नजरअंदाज करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ होगा। वहीं, यिस्राइल बेतेनु पार्टी के प्रमुख एविगडोर लिबरमैन ने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी ऐसी सरकार में शामिल नहीं होगी, जिसमें उनके मुताबिक आतंकवाद का समर्थन करने वाले लोग हों। प्रधानमंत्री नेतन्याहू के बेटे यायर नेतन्याहू ने इजराइल के अरब नागरिकों को देश के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बाद अरब नागरिक इजराइल के सामने सबसे बड़ी चुनौती हैं। उनके इस बयान से राजनीतिक विवाद और बढ़ गया है।

 

विपक्षी नेता को प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव
इस बीच नेतन्याहू के सहयोगी दल यूनाइटेड टोरा जूडिज्म ने विपक्षी नेता गादी आइजनकोट को प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव दिया है। पार्टी को चुनाव में 7 सीटें मिली हैं। इसके बदले उसने हरेदी समुदाय के धार्मिक छात्रों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट देने की मांग की है। इजराइल में सरकार बनाने के लिए 120 सदस्यीय संसद में 61 सीटों का समर्थन जरूरी होता है। सरकार बनाने का दावा पेश करने वाले नेता को शुरुआत में 28 दिन मिलते हैं, जिसे राष्ट्रपति 14 दिन और बढ़ा सकते हैं।

 

 चुनाव परिणामों ने नेतन्याहू के लिए ईरान के खिलाफ नए सैन्य अभियान का फैसला भी मुश्किल कर दिया है। 'द यरूशलम पोस्ट' के मुताबिक, नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत से पीछे है और सरकार बनाने के लिए उन्हें दूसरे दलों का समर्थन जुटाना होगा। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली सेना प्रमुख के विरोध के कारण ईरान पर संभावित हमले टाले गए थे। ऐसे में इजराइल की आंतरिक राजनीतिक स्थिति का असर उसकी विदेश और सुरक्षा नीति पर भी पड़ सकता है।
 

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