Edited By Anu Malhotra,Updated: 10 Apr, 2026 11:24 AM

भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' को लेकर एक बड़ी और उत्साहजनक खबर आई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में 'इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट-02' (IADT-02) को सफलतापूर्वक पूरा कर...
नई दिल्ली: भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' को लेकर एक बड़ी खबर आई है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में 'इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट-02' (IADT-02) को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह परीक्षण इस बात की पुष्टि करता है कि जब हमारे अंतरिक्ष यात्री स्पेस से वापस लौटेंगे, तो उनका यान सुरक्षित तरीके से धरती पर लैंड कर सकेगा।
क्या है यह टेस्ट और क्यों है जरूरी?
जब अंतरिक्ष यान (Crew Module) वापस पृथ्वी के वायुमंडल में आता है, तो उसकी रफ्तार बहुत तेज होती है। यात्रियों की जान बचाने के लिए उस रफ्तार को कम करना सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसी काम के लिए 'पैराशूट सिस्टम' बनाया गया है। इस टेस्ट में यह जांचा गया कि क्या सभी पैराशूट (ड्रोग, पायलट और मेन पैराशूट) सही समय पर और सही क्रम में खुल रहे हैं या नहीं। परीक्षण के दौरान यान की गति को नियंत्रित कर उसे सुरक्षित लैंडिंग के लायक बनाया गया।
मिशन गगनयान: भारत का गौरव
ISRO का लक्ष्य अगले साल यानी 2027 तक तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर अंतरिक्ष में भेजना है।
तीन दिन का मिशन: यात्री तीन दिन अंतरिक्ष में बिताएंगे। इस मिशन के लिए भारत अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM3 का उपयोग कर रहा है। मिशन का सबसे अहम हिस्सा यात्रियों को सुरक्षित समुद्र में लैंड कराना है।
जितेंद्र सिंह ने दी बधाई
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस सफलता पर खुशी जताते हुए 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर ISRO की टीम को बधाई दी। उन्होंने इसे मिशन की तैयारी में एक 'ऐतिहासिक मील का पत्थर' बताया। उन्होंने कहा कि भारत अब मानव को अंतरिक्ष में भेजने की अपनी क्षमता के बेहद करीब है।
किसने दिया साथ?
इस मिशन की सफलता के पीछे सिर्फ इसरो ही नहीं, बल्कि कई अन्य संस्थाएं भी कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं:
भारतीय वायु सेना: चिनूक हेलीकॉप्टर के जरिए टेस्टिंग में मदद।
भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड: समुद्र में गिरे मॉड्यूल को सुरक्षित बाहर निकालने की जिम्मेदारी।
DRDO: तकनीकी सहायता और सुरक्षा उपकरण।