Edited By Anu Malhotra,Updated: 10 Jan, 2026 08:46 AM

भारत में फेफड़ों का कैंसर अब सिर्फ धूम्रपान से जुड़ी बीमारी नहीं रह गई है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के नए अध्ययन ने एक गंभीर भविष्य की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2030 तक देश में फेफड़ों के कैंसर के मामलों में तेज...
नेशनल डेस्क: भारत में फेफड़ों का कैंसर अब सिर्फ धूम्रपान से जुड़ी बीमारी नहीं रह गई है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के नए अध्ययन ने एक गंभीर भविष्य की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2030 तक देश में फेफड़ों के कैंसर के मामलों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है और इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी मार महिलाओं पर पड़ने वाली है।
महिलाओं में खतरा पुरुषों से ज्यादा क्यों?
अध्ययन में सामने आया है कि कई क्षेत्रों में महिलाओं में फेफड़ों के कैंसर के मामले हर साल औसतन 6.7 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे हैं, जबकि पुरुषों में यह बढ़ोतरी करीब 4.3 प्रतिशत है। यह अंतर इसलिए भी चौंकाता है क्योंकि कई जगहों पर महिलाओं में तंबाकू और शराब का सेवन अपेक्षाकृत कम है।
उत्तर-पूर्व सबसे ज्यादा प्रभावित
ICMR ने देश के छह अलग-अलग क्षेत्रों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इसमें उत्तर-पूर्व भारत सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र के रूप में उभरा। यहां महिलाओं में फेफड़ों के कैंसर की दर पुरुषों के लगभग बराबर पहुंच चुकी है। मिजोरम की राजधानी आइजोल में इस बीमारी से होने वाली मौतों की दर सबसे अधिक दर्ज की गई, जो स्वास्थ्य तंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है।
दक्षिण भारत की अलग तस्वीर
-दक्षिण भारत में स्थिति थोड़ी अलग लेकिन उतनी ही चिंताजनक है।
-केरल के कन्नूर, कासरगोड और कोल्लम जैसे जिलों में पुरुषों में फेफड़ों के कैंसर के मामले ज्यादा पाए गए, जबकि इन इलाकों में नशे की आदतें अपेक्षाकृत कम हैं।
-महिलाओं में हैदराबाद और बेंगलुरु ऐसे शहर बनकर उभरे हैं जहां फेफड़ों के कैंसर के मामले सबसे अधिक दर्ज किए गए।
उत्तर भारत में भी बढ़ती चिंता
उत्तर भारत में श्रीनगर में पुरुषों में फेफड़ों के कैंसर की दर ऊंची पाई गई। वहीं श्रीनगर और पुलवामा में महिलाओं में भी कम नशे के बावजूद बीमारी की दर ज्यादा रही, जो पर्यावरणीय प्रदूषण और घरेलू ईंधन जैसे अन्य कारणों की ओर इशारा करता है।
सबसे तेज बढ़ोतरी वाले इलाके
रिपोर्ट के अनुसार:
अनुमान है कि 2030 तक केरल के कुछ हिस्सों में पुरुषों में फेफड़ों के कैंसर की दर प्रति लाख 33 मामलों से ऊपर पहुंच सकती है। वहीं बेंगलुरु में महिलाओं में यह आंकड़ा प्रति लाख 8 से अधिक हो सकता है।
वैश्विक स्तर पर भी हालात गंभीर
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पहले ही कैंसर को लेकर वैश्विक चेतावनी दे चुका है।
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वर्ष 2022 में दुनिया भर में 2 करोड़ नए कैंसर मामले सामने आए
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97 लाख लोगों की मौत कैंसर के कारण हुई
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हर 5 में से 1 व्यक्ति को जीवनकाल में कैंसर होने का खतरा है
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हर 9 में से 1 पुरुष और 12 में से 1 महिला की मौत कैंसर से होती है