Magh Vinayak Chaturthi 2026: गणेश जयंती की सही तिथि, पूजा मुहूर्त, विधि और धार्मिक महत्व

Edited By Updated: 21 Jan, 2026 10:38 PM

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हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को माघ विनायक चतुर्थी या गणेश जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस पावन दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत करने से बुद्धि, विवेक, सफलता, सुख-समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है। य

नेशनल डेस्क: हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को माघ विनायक चतुर्थी या गणेश जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस पावन दिन भगवान गणेश की पूजा और व्रत करने से बुद्धि, विवेक, सफलता, सुख-समृद्धि और संतान सुख की प्राप्ति होती है। यह पर्व विशेष रूप से महाराष्ट्र, गोवा और कोंकण क्षेत्र में धूमधाम से मनाया जाता है, जबकि उत्तर भारत में भाद्रपद मास की गणेश चतुर्थी अधिक प्रचलित है।

वर्ष 2026 में माघ विनायक चतुर्थी 22 जनवरी (गुरुवार) को मनाई जाएगी। यह दिन नए कार्यों की शुरुआत, विघ्नों के नाश और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के संचार के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।

 माघ विनायक चतुर्थी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

  • चतुर्थी तिथि आरंभ: 22 जनवरी 2026, सुबह 02:47 बजे
  • चतुर्थी तिथि समाप्त: 23 जनवरी 2026, सुबह 02:28 बजे
  • मध्याह्न गणेश पूजा मुहूर्त: सुबह 11:29 बजे से दोपहर 01:37 बजे तक
  • चंद्र दर्शन निषेध समय: सुबह 09:22 बजे से रात 09:19 बजे तक

स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में अंतर हो सकता है।

गणेश जयंती का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन माता पार्वती ने अपने उबटन से भगवान गणेश की रचना की थी। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि, ज्ञान और शुभता का प्रतीक माना जाता है। उनकी उपासना से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और कार्यों में सफलता मिलती है।

माघ विनायक चतुर्थी का व्रत विशेष रूप से: संतान प्राप्ति,शिक्षा और करियर में उन्नति,व्यापार और नौकरी में सफलता और मानसिक शांति और सकारात्मकता के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।

माघ विनायक चतुर्थी पूजा विधि 

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थान को साफ कर गंगाजल से शुद्ध करें।
  • भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
  • दीपक जलाएं और लाल या पीले फूल अर्पित करें।
  • सिंदूर से तिलक करें और 21 दूर्वा की गांठें चढ़ाएं।
  • मोदक, लड्डू या तिल से बनी मिठाई का भोग लगाएं।
  • “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र, गणेश स्तोत्र या अथर्वशीर्ष का पाठ करें।
  • अंत में गणेश आरती करें और क्षमा प्रार्थना करें।
  • व्रती भक्त चंद्र दर्शन के बाद पारण करें।

इस विधि से पूजा करने पर घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।

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