Edited By Rohini Oberoi,Updated: 11 Jan, 2026 08:58 AM

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी विदेशी मुद्रा प्रबंधन रणनीति में एक बड़ा और रणनीतिक बदलाव किया है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत अब अपनी निर्भरता अमेरिकी डॉलर और वहां के सरकारी बॉन्ड से कम कर रहा है जबकि सोने (Gold) पर भरोसा बढ़ा रहा...
नेशनल डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी विदेशी मुद्रा प्रबंधन रणनीति में एक बड़ा और रणनीतिक बदलाव किया है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत अब अपनी निर्भरता अमेरिकी डॉलर और वहां के सरकारी बॉन्ड से कम कर रहा है जबकि सोने (Gold) पर भरोसा बढ़ा रहा है। अमेरिकी बॉन्ड में भारत का निवेश घटकर 200 अरब डॉलर से भी कम रह गया है
अमेरिकी बॉन्ड से दूरी: $50 अरब का जोखिम कम किया
RBI ने अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड (US Treasury Bonds) में अपनी हिस्सेदारी को तेजी से घटाया है। अब अमेरिकी बॉन्ड में भारत का निवेश घटकर 200 अरब डॉलर से भी कम रह गया है। पिछले एक साल के भीतर RBI ने अपनी हिस्सेदारी में 50 अरब डॉलर से अधिक की कमी की है। जानकार मानते हैं कि डॉलर के उतार-चढ़ाव और वैश्विक भू-राजनीतिक (Geopolitical) जोखिमों से बचने के लिए भारत यह कदम उठा रहा है।
सोने का भंडार: 880 मीट्रिक टन के पार
एक तरफ जहां डॉलर आधारित संपत्तियों को बेचा जा रहा है वहीं दूसरी तरफ RBI अपने सोने के भंडार (Gold Reserves) को लगातार मजबूत कर रहा है। भारत का कुल स्वर्ण भंडार अब बढ़कर 880 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। सोना हमेशा से ही आर्थिक संकट के समय सबसे सुरक्षित संपत्ति माना जाता है इसलिए RBI धीरे-धीरे अपनी विदेशी मुद्रा के एक बड़े हिस्से को सोने में बदल रहा है।
विदेशी मुद्रा भंडार की वर्तमान स्थिति
इन बड़े बदलावों के बावजूद भारत की कुल आर्थिक स्थिति काफी मजबूत बनी हुई है:
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कुल भंडार: भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) 685 अरब डॉलर के स्तर पर स्थिर है।
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मजबूत स्थिति: यह विशाल भंडार भारत को आयात बिलों का भुगतान करने और रुपये की वैल्यू को स्थिर रखने में बड़ी मदद करता है।