Edited By Anu Malhotra,Updated: 09 Feb, 2026 04:59 PM

अगर आप भी बैंक कर्मचारियों की बातों को पत्थर की लकीर मानते हैं, तो नागपुर की यह घटना आपकी आँखें खोल देगी। सरकारी बैंक केनरा बैंक के एक मैनेजर पर आरोप लगा है कि उन्होंने अपने 'टारगेट' पूरे करने के चक्कर में एक 90 वर्षीय वयोवृद्ध ग्राहक को अपना शिकार...
नेशनल डेस्क: अगर आप भी बैंक कर्मचारियों की बातों को पत्थर की लकीर मानते हैं, तो नागपुर की यह घटना आपकी आंखें खोल देगी। सरकारी बैंक केनरा बैंक के एक मैनेजर पर आरोप लगा है कि उन्होंने अपने 'टारगेट' पूरे करने के चक्कर में एक 90 वर्षीय ग्राहक को अपना शिकार बनाया। इसे 'वित्तीय डकैती' और 'मिस-सेलिंग' का एक भयावह उदाहरण माना जा रहा है, जहां एक ऐसे व्यक्ति को जीवन बीमा थमा दिया गया जिसकी मैच्योरिटी देखने के लिए उसे करीब 200 साल तक जीवित रहना पड़ता।
99 साल बाद मिलने वाला सपना और 2 लाख का प्रीमियम
दशकों से केनरा बैंक से जुड़े वेंकटचलम वी. अय्यर को बैंक मैनेजर ने अपनी चिकनी-चुपड़ी बातों में फंसाकर बुजुर्ग को ₹2,00,000/सालाना प्रीमियम वाली पॉलिसी बेच दी और 2 वर्षों में खाते से 24,00,000 काटे गए। बैंक ने कहा, "हम इस मामले को संबंधित टीम तक भेज रहे हैं। इस उम्र में जहां इंसान को अपनी जमापूंजी की सुरक्षा की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, वहां बैंक ने उनकी गाढ़ी कमाई पर हाथ साफ कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पॉलिसी की मैच्योरिटी तारीख वर्ष 2124 रखी गई थी। यानी 90 साल के बुजुर्ग को यह झांसा दिया गया कि 100 साल बाद उनके निवेश का फल मिलेगा।
जालसाजी का शातिर तरीका
90 साल की उम्र में किसी को बीमा देना नियमों के खिलाफ है, इसलिए इस 'वित्तीय खेल' को अंजाम देने के लिए एक चालाकी भरी योजना बनाई गई। बैंक मैनेजर ने कथित तौर पर अय्यर साहब को उनकी बेटी के साथ एक संयुक्त खाता खोलने की सलाह दी। इसके बाद, बेटी को "बीमित व्यक्ति" (Life Assured) बना दिया गया, जबकि प्रीमियम का भुगतान पिता के खाते से करवाया गया। बुजुर्ग को लगा कि यह कोई जरूरी बैंक प्रक्रिया है और उन्होंने मैनेजर पर भरोसा करके हस्ताक्षर कर दिए। मामला तब खुला जब दूसरी किस्त के लिए बैंक का फोन आया और घबराए हुए अय्यर ने अपने परिवार को इसकी जानकारी दी।
एक्स (Twitter) पर फूटा गुस्सा, बैंक ने टेके घुटने
अय्यर के पोते (दामाद) साकेत आर ने जब इस पूरी कहानी को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किया, तो इंटरनेट पर हड़कंप मच गया। लोग पूछने लगे कि IRDAI और RBI के कड़े नियमों के बावजूद बैंक ने इतनी बड़ी चूक कैसे की? मामला बढ़ता देख बैंक के क्षेत्रीय अधिकारी रविवार को ही बुजुर्ग के घर पहुंचे और एक हफ्ते के भीतर पूरा पैसा लौटाने का वादा किया।
बैंक की सफाई पर उठे सवाल
हालांकि केनरा बैंक ने इस मामले पर खेद जताया है, लेकिन उनकी आधिकारिक प्रतिक्रिया को लोग केवल 'लीपापोती' मान रहे हैं। बैंक ने पीड़ित परिवार से सार्वजनिक मंच पर जानकारी साझा न करने की अपील की है, लेकिन उस नैतिक पतन और नियमों के उल्लंघन पर चुप्पी साध ली है जिसके कारण एक बुजुर्ग का दशकों पुराना भरोसा टूट गया। यह घटना हर उस वरिष्ठ नागरिक के लिए चेतावनी है जो बैंकों में अपनी बचत को सुरक्षित मानते हैं।