Edited By Anu Malhotra,Updated: 09 Jan, 2026 09:10 AM

कीमती धातुओं के बाजार में अचानक हलचल मच गई है। जिस चांदी को निवेशक अब तक सुरक्षित ठिकाना मानते रहे, उसमें एक ही दिन में करीब ₹10,000 की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इसी बीच एक बड़े वैश्विक बैंक की रिपोर्ट सामने आई है, जिसने न सिर्फ मौजूदा गिरावट की वजहों...
नेशनल डेस्क: कीमती धातुओं के बाजार में अचानक हलचल मच गई है। जिस चांदी को निवेशक अब तक सुरक्षित ठिकाना मानते रहे, उसमें एक ही दिन में करीब ₹10,000 की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इसी बीच एक बड़े वैश्विक बैंक की रिपोर्ट सामने आई है, जिसने न सिर्फ मौजूदा गिरावट की वजहों पर रोशनी डाली है, बल्कि 2029 तक सोने-चांदी की संभावित चाल को लेकर भी अहम संकेत दिए हैं।
MCX पर मार्च 2026 डिलीवरी वाली चांदी बुधवार को ₹2,50,605 प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। लेकिन अगले ही दिन बाजार खुलते ही जबरदस्त बिकवाली शुरू हो गई। देखते-ही-देखते भाव ₹10,000 तक टूटकर ₹2,40,605 प्रति किलोग्राम के निचले स्तर तक पहुंच गए। दोपहर तक इसमें थोड़ी रिकवरी जरूर दिखी, लेकिन तब भी चांदी ₹2,43,911 पर कारोबार कर रही थी, जो पिछले बंद भाव से करीब ₹6,700 या लगभग 2.7 प्रतिशत कम था।
क्यों बदला माहौल?
बीते महीनों में सप्लाई की कमी और मजबूत मांग के कारण चांदी की कीमतें लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही थीं। लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। वैश्विक बैंक HSBC की ताजा रिपोर्ट ने बाजार को सतर्क कर दिया है। बैंक का मानना है कि चांदी की हालिया तेजी अब कमजोर पड़ने लगी है और कीमतें अस्थिरता के बीच अपने वास्तविक स्तर से ऊपर पहुंच गई हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जहां सोना अब भी सुरक्षित निवेश के तौर पर मजबूती दिखा रहा है, वहीं चांदी की औद्योगिक और आभूषण मांग पर दबाव बढ़ रहा है। ऊंचे दामों ने गहनों की खरीदारी को धीमा कर दिया है, जिसका सीधा असर खपत पर पड़ रहा है।
आगे क्या कहता है अनुमान?
HSBC ने 2026 के लिए चांदी की औसत कीमत का अनुमान बढ़ाकर 68.25 डॉलर प्रति औंस कर दिया है, जो पहले 44.50 डॉलर था। यानी अल्पकाल में कीमतें ऊंचे स्तर पर रह सकती हैं। हालांकि, बैंक को 2027 में बड़ी गिरावट की उम्मीद है और अनुमान है कि दाम घटकर करीब 57 डॉलर प्रति औंस तक आ सकते हैं। इससे भी आगे, 2029 तक चांदी के भाव नरम होकर लगभग 47 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंचने का अनुमान है।
डॉलर, निवेश और कमजोर होती मांग
रिपोर्ट के मुताबिक कमजोर अमेरिकी डॉलर और संस्थागत निवेश से निकट भविष्य में चांदी को कुछ सहारा मिल सकता है। लेकिन असली चिंता औद्योगिक मांग को लेकर है, जो धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है। ऊंची कीमतों के कारण ज्वेलरी सेक्टर में खरीद घटने से बाजार की रफ्तार सुस्त हो रही है।
सप्लाई बढ़ी, कमी घटी
सप्लाई की बात करें तो चांदी का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। रीसाइक्लिंग और दूसरी धातुओं से उप-उत्पाद के रूप में मिलने वाली चांदी की उपलब्धता भी बढ़ी है। 2025 में जहां चांदी की कमी करीब 230 मिलियन औंस थी, वहीं 2026 में इसके घटकर 140 मिलियन औंस और 2027 में सिर्फ 59 मिलियन औंस रहने का अनुमान है। साथ ही, बाजार में स्टॉक भी बढ़ रहे हैं, जो लंबी अवधि में कीमतों पर दबाव बना सकते हैं।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
कुल मिलाकर, सिक्कों और बार की मांग से चांदी को कुछ हद तक सहारा मिल सकता है, लेकिन आगे का रास्ता आसान नहीं दिखता। सप्लाई और मांग के समीकरण बदल रहे हैं, जिससे कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे जल्दबाजी से बचें, बाजार के संकेतों को समझें और सोच-समझकर कदम उठाएं।