Edited By Parveen Kumar,Updated: 03 Sep, 2026 05:51 PM

राजस्थान में सड़क दुर्घटनाओं और हादसों में होने वाली मौतों को कम करने के लिए जयपुर रेंज पुलिस ने तकनीक आधारित नई पहल शुरू की है। ‘ऑपरेशन सेफर रोड्स’ के तहत अब वाहन चालकों को किसी खतरनाक सड़क या ब्लैक स्पॉट पर पहुंचने से करीब 200 मीटर पहले ही अलर्ट...
नेशनल डेस्क : राजस्थान में सड़क दुर्घटनाओं और हादसों में होने वाली मौतों को कम करने के लिए जयपुर रेंज पुलिस ने तकनीक आधारित नई पहल शुरू की है। ‘ऑपरेशन सेफर रोड्स’ के तहत अब वाहन चालकों को किसी खतरनाक सड़क या ब्लैक स्पॉट पर पहुंचने से करीब 200 मीटर पहले ही अलर्ट मिल जाएगा। इसके लिए दुर्घटना संभावित स्थानों की डिजिटल मैपिंग कर उन्हें Google Maps से जोड़ा गया है।
101 दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान
जयपुर रेंज के प्रमुख नेशनल और स्टेट हाईवे पर वर्ष 2023 से 2025 के बीच हुए सड़क हादसों का विस्तृत अध्ययन किया गया। इस दौरान 101 ऐसे स्थानों की पहचान की गई, जहां दुर्घटनाओं का खतरा सबसे अधिक पाया गया। इन सभी जगहों को डिजिटल रूप से मैप कर नेविगेशन सिस्टम से जोड़ा गया है। अब वाहन चालक जैसे ही इन स्थानों की ओर बढ़ेंगे, उन्हें करीब 200 मीटर पहले ही वॉयस और विजुअल अलर्ट मिलेगा। इसका उद्देश्य चालकों को पहले से सतर्क करना, गति कम करवाना और संभावित हादसों को रोकना है।
जयपुर ग्रामीण में सबसे ज्यादा ब्लैक स्पॉट
जयपुर रेंज में चिन्हित 101 ब्लैक स्पॉट में सबसे ज्यादा 28 स्थान जयपुर ग्रामीण में हैं। इसके अलावा दौसा में 24, कोटपूतली-बहरोड़ में 19, अलवर में 11, सीकर में 10, भिवाड़ी में 5, खैरथल-तिजारा में 3 और झुंझुनूं में एक दुर्घटना संभावित स्थान की पहचान की गई है।
मौतों के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा
पुलिस ने इन 101 स्थानों को वहां हुए हादसों और मौतों के आंकड़ों के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा है। रेड यानी A श्रेणी में 6 बेहद संवेदनशील स्थान हैं, जहां 20 से अधिक लोगों की मौत हुई है। ऑरेंज यानी B श्रेणी में 30 स्थान शामिल हैं, जहां 10 से 20 मौतें दर्ज की गईं। वहीं येलो यानी C श्रेणी में 57 स्थान हैं, जहां 5 से 10 लोगों की जान गई है। इन सभी ब्लैक स्पॉट की स्थिति की हर तीन महीने में समीक्षा की जाएगी, ताकि जरूरत के अनुसार सुरक्षा उपायों में बदलाव किया जा सके।
पूरे राजस्थान में लागू करने की तैयारी
जयपुर रेंज में इस तकनीकी व्यवस्था की शुरुआत के बाद अब इसे राजस्थान के अन्य प्रमुख हाईवे पर भी लागू करने की तैयारी है। इसके लिए डीजी ट्रैफिक और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के क्षेत्रीय निदेशक को पत्र भेजा गया है।