नीतीश कैबिनेट का बड़ा फैसला: मंत्रियों और 15 वरिष्ठ विधायकों को मिलेंगे दो-दो बंगले

Edited By Updated: 14 Jan, 2026 03:58 PM

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बिहार की राजनीतिक हलचल अब एक नए फैसले के कारण और तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में एक ऐसा निर्णय लिया गया है, जिसने विधानमंडल और मंत्रिपरिषद के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। सरकार ने मंत्रियों...

नेशनल डेस्क: बिहार की राजनीतिक हलचल अब एक नए फैसले के कारण और तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में एक ऐसा निर्णय लिया गया है, जिसने विधानमंडल और मंत्रिपरिषद के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। सरकार ने मंत्रियों और कुछ वरिष्ठ विधायकों को राजधानी पटना में ‘डबल बंगले’ उपलब्ध कराने की नीति को मंजूरी दे दी है।

इस योजना के तहत केवल मंत्रियों को ही नहीं, बल्कि कुछ ऐसे विधायक भी अतिरिक्त आवास के हकदार होंगे जो वर्तमान में मंत्री नहीं हैं, लेकिन लंबे समय से विधानसभा और राजनीतिक कार्यों में सक्रिय हैं। सरकार का कहना है कि यह कदम न केवल कार्यकुशलता बढ़ाएगा, बल्कि विधायकों को अपने निर्वाचन क्षेत्र और राज्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों में आसानी भी देगा। वहीं विपक्ष ने इसे सरकारी संसाधनों की बर्बादी करार दिया है।

नीतीश कैबिनेट ने इस फैसले के साथ 15 वरिष्ठ विधायकों को भी पटना में अतिरिक्त बंगला देने का रास्ता खोला है। इन विधायकों को उनके निर्वाचन क्षेत्र में मिलने वाले सामान्य विधायक आवास के अलावा, राजधानी पटना के केंद्रीय पूल से बड़ा बंगला किराए पर आवंटित किया जाएगा।

भवन निर्माण विभाग ने इसकी शर्तें स्पष्ट की हैं:
-यह सुविधा केवल उन विधायकों को मिलेगी, जो 6 या उससे अधिक बार विधानसभा सदस्य रह चुके हों।
-या जिन विधायकों ने कम से कम एक बार मंत्रिपरिषद में स्थान प्राप्त किया हो।
-या तीन बार राज्य मंत्रिपरिषद का हिस्सा रह चुके हों, या कभी मुख्यमंत्री/उपमुख्यमंत्री पद पर रहे हों।
-इन मानदंडों के आधार पर कुल 15 विधायकों का चयन किया जाएगा, जिन्हें राजनीतिक रूप से संतुष्ट रखने का यह तरीका माना जा रहा है।

मंत्रियों और High Officials को भी दो बंगले
कैबिनेट के नए फैसले के अनुसार, अब सभी मंत्रियों, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विधान परिषद के सभापति व उपसभापति को दो-दो आवास उपलब्ध होंगे। इसमें केंद्रीय पूल के बंगले के साथ-साथ निर्वाचन क्षेत्र आधारित विधायक आवास भी शामिल है। सरकार का तर्क है कि दो बंगले होने से मंत्री और वरिष्ठ विधायक दोनों अपने क्षेत्र और विभागीय जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभा पाएंगे।

किराया केवल 1700 रुपये प्रति माह
अतिरिक्त बंगले के लिए विधायकों को केवल 1700 रुपए प्रति माह का मामूली किराया देना होगा। सरकार के अनुसार, कई मंत्री विधायक भी होते हैं, जिन्हें अपने क्षेत्र की जनता से नियमित संपर्क और विधायी कार्य के लिए आवास की आवश्यकता होती है।

विपक्ष का विरोध
RJD ने इस फैसले पर तीखा विरोध जताया है। प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने इसे अनैतिक और अनुचित करार देते हुए कहा कि वर्तमान सरकारी और विधायक आवास पर्याप्त हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर मौजूदा बंगले ही पर्याप्त हैं, तो क्यों अतिरिक्त बंगले दिए जा रहे हैं। आरजेडी ने इसे केवल राजनीतिक संतुलन और संसाधनों के अनुचित प्रयोग के रूप में देखा।

सरकारी बंगले विवाद की पुरानी परंपरा
बिहार में सरकारी बंगलों को लेकर विवाद नया नहीं है। तेजस्वी यादव के बंगले से लेकर पूर्व मंत्रियों के आवास खाली कराने तक, यह मुद्दा हमेशा सुर्खियों में रहा है। अब 15 वरिष्ठ विधायकों और मंत्रियों को दो-दो बंगले देने का निर्णय नए विवाद को जन्म देने वाला प्रतीत होता है।


 

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