मरीजों के लिए खुशखबरी! अब सिर्फ एक Blood Test में ही पकड़ी जाएंगी ढेरों बीमारियां, बार-बार टेस्ट की नहीं पड़ेगी जरूरत

Edited By Updated: 21 Jan, 2026 03:09 PM

now a single test will reveal many diseases

भारत में स्वास्थ्य जांच की दुनिया में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) एक ऐसी आधुनिक तकनीक पर काम कर रहा है जिससे मरीजों को बार-बार अलग-अलग टेस्ट करवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक ही मल्टीप्लेक्स टेस्ट के जरिए अब...

ICMR Multiplex Diagnostic Test : भारत में स्वास्थ्य जांच की दुनिया में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) एक ऐसी आधुनिक तकनीक पर काम कर रहा है जिससे मरीजों को बार-बार अलग-अलग टेस्ट करवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक ही मल्टीप्लेक्स टेस्ट के जरिए अब डेंगू, कोविड, फ्लू और टाइफाइड जैसी कई बीमारियों का पता एक साथ लगाया जा सकेगा। यह कदम न केवल इलाज को तेज करेगा बल्कि देश में बढ़ते एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) यानी दवाओं के बेअसर होने के खतरे को भी कम करेगा।

मौजूदा सिस्टम की चुनौती: देरी और बढ़ता खर्च

वर्तमान में जब किसी मरीज को बुखार या सांस लेने में तकलीफ होती है तो डॉक्टर लक्षणों के आधार पर एक-एक करके टेस्ट करवाते हैं। पहले एक टेस्ट होता है उसकी रिपोर्ट निगेटिव आने पर दूसरा टेस्ट लिखा जाता है। इस चक्कर में कई दिन निकल जाते हैं। सही बीमारी का पता देर से चलने के कारण मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है। बार-बार अलग-अलग जांच कराने से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पैसों का भारी बोझ पड़ता है।

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समाधान: मल्टीप्लेक्स मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक्स

ICMR जिस नई तकनीक को विकसित कर रहा है उसे मल्टीप्लेक्स टेस्ट कहा जाता है। इसकी खासियतें इस प्रकार हैं:

  1. एक सैंपल, अनेक नतीजे: मरीज के एक ही खून या स्वाब सैंपल से कई तरह के वायरस और बैक्टीरिया की पहचान हो जाएगी।

  2. सटीक इलाज: डॉक्टरों को तुरंत पता चल जाएगा कि संक्रमण का असली कारण क्या है जिससे इलाज पहले दिन से ही सही दिशा में शुरू होगा।

  3. गंभीर मरीजों के लिए वरदान: सेप्सिस (खून में जहर फैलना) जैसी स्थितियों में जहां हर मिनट कीमती होता है वहां यह तकनीक जान बचा सकती है।

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एंटीबायोटिक दवाओं की बर्बादी पर रोक

अक्सर जांच रिपोर्ट आने में देरी के कारण डॉक्टर मरीज को 'ब्रॉड-स्पेक्ट्रम' (तेज असर वाली) एंटीबायोटिक दवाएं दे देते हैं। ICMR की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में कई आम एंटीबायोटिक्स अब बैक्टीरिया पर बेअसर साबित हो रही हैं। अगर नई जांच से बीमारी तुरंत पता चल जाती है तो डॉक्टर केवल वही दवा देंगे जिसकी जरूरत है। इससे शरीर में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (AMR) नहीं बढ़ेगी।

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भारत की जरूरतों के अनुसार स्वदेशी टेस्ट

ICMR इन टेस्ट किट्स को भारत में होने वाली आम बीमारियों के डेटा के आधार पर तैयार कर रहा है। कोविड-19 ने हमें सिखाया कि बीमारी की जल्दी पहचान कितनी जरूरी है। ये नए टूल्स भविष्य में किसी भी आउटब्रेक को शुरू होते ही पकड़ने में मदद करेंगे। बच्चों में एंटीबायोटिक दवाओं के बढ़ते गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए भी विशेष डायग्नोस्टिक टूल्स पर काम किया जा रहा है।

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