Edited By Pardeep,Updated: 06 Jan, 2026 10:04 PM
नया साल 2026 शुरू हो चुका है और इसके साथ ही साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले समय में ठग पहले से ज्यादा शातिर तरीके अपनाएंगे। ऐसे में आम लोगों को पहले से कहीं...
नेशनल डेस्कः नया साल 2026 शुरू हो चुका है और इसके साथ ही साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी के मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले समय में ठग पहले से ज्यादा शातिर तरीके अपनाएंगे। ऐसे में आम लोगों को पहले से कहीं ज्यादा सतर्क और जागरूक रहने की जरूरत है।
किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक, फोटो, वीडियो, ऐप या मैसेज पर बिना सोचे-समझे क्लिक करना आज के समय में बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। एक छोटी-सी गलती आपकी पूरी जमा पूंजी और डिजिटल पहचान छीन सकती है।
बिना मेहनत के ठगी कर रहे हैं साइबर अपराधी
आज के समय में साइबर ठगों और हैकर्स को ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ती। वे बेहद शांति और भरोसे के साथ अपना काम करते हैं। आपने कई बार सुना होगा कि एक फोन कॉल या मैसेज के बाद कुछ ही मिनटों में बैंक अकाउंट खाली हो गया। सबसे खतरनाक बात यह है कि यह सब आपकी नाक के नीचे होता है और आपको शुरुआत में इसका अहसास तक नहीं होता। कई मामलों में पीड़ित को तुरंत फ्रॉड का पता चल जाता है, लेकिन कई बार कई दिन या हफ्तों बाद सच्चाई सामने आती है।
आपका डर ही ठगों की सबसे बड़ी ताकत
भारत में बढ़ते साइबर फ्रॉड का पैटर्न लगभग एक जैसा है। ठग सबसे पहले पीड़ित के डर और भरोसे को निशाना बनाते हैं। आप कितनी जल्दी घबरा जाते हैं, सामने वाले की बातों पर कितना विश्वास करते हैं—यही उनकी पहली जीत होती है।
ठगों के पास पहले से होता है आपका पूरा डेटा
अक्सर लोगों को लगता है कि ठगों को उनका नंबर कैसे मिला, लेकिन सच्चाई यह है कि ठगी की शुरुआत बहुत पहले हो चुकी होती है। आपका नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल, बैंक का नाम, हाल की शॉपिंग या ट्रांजैक्शन की जानकारी ठगों के पास पहले से मौजूद होती है। यह डेटा फर्जी ऐप्स, असुरक्षित वेबसाइट्स, डेटा लीक और कॉल सेंटर की लीड लिस्ट जैसे कई तरीकों से ठगों तक पहुंच जाता है।
फिर आती है भरोसेमंद दिखने वाली फर्जी कॉल
जब ठगों के पास आपका सही डेटा होता है, तब वे कॉल करते हैं। फोन करने वाला खुद को बैंक अधिकारी, पुलिस, CBI और टेक सपोर्ट बताता है। उनकी आवाज आत्मविश्वास से भरी होती है और बात करने का तरीका बिल्कुल प्रोफेशनल लगता है। कई बार वे कहते हैं किआपके अकाउंट में संदिग्ध गतिविधि मिली है। आपके नाम पर पुलिस शिकायत दर्ज है। आपका सिम या बैंक अकाउंट बंद होने वाला है।
डर का माहौल बनाकर करते हैं बड़ा खेल
जैसे ही आप उनकी बातों पर भरोसा करने लगते हैं, आप पैनिक मोड में चले जाते हैं। ठग इसी स्थिति का फायदा उठाते हैं। वे कहते हैं कि समस्या तुरंत सुलझाने के लिए एक ऐप डाउनलोड करें, किसी लिंक पर क्लिक करें और स्क्रीन शेयर ऑन करें। ये ऐप और लिंक देखने में बिल्कुल असली लगते हैं, लेकिन असल में ये ठगों को आपके फोन का पूरा कंट्रोल दे देते हैं।
OTP या स्क्रीन शेयर होते ही अकाउंट साफ
जैसे ही आप OTP बता देते हैं या स्क्रीन शेयर ऑन होती है, खेल खत्म हो जाता है। कुछ ही मिनटों में बैंक अकाउंट से पैसे निकल जाते हैं, UPI ट्रांजैक्शन हो जाते हैं और कई मामलों में आपके नाम पर लोन भी ले लिया जाता है। जब तक इंसान संभलता है, तब तक पूरा अकाउंट खाली हो चुका होता है।
पढ़े-लिखे लोग भी बन रहे हैं शिकार
हैरानी की बात यह है कि ठगी का शिकार सिर्फ अनजान लोग नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेशनल्स और टेक्नोलॉजी समझने वाले लोग भी हो रहे हैं। ठग सीधे आपकी समझ पर नहीं, बल्कि आपके डर और भरोसे पर हमला करते हैं।
पकड़ से दूर रहते हैं साइबर अपराधी
साइबर ठग VPN, फर्जी सिम कार्ड और इंटरनेशनल सर्वर का इस्तेमाल करते हैं। कई बार कॉल किसी और देश से होती है, पैसा किसी दूसरे देश में ट्रांसफर हो जाता है और डिजिटल निशान कहीं और छुपा होता है। इसी वजह से इन अपराधियों को पकड़ना बेहद मुश्किल हो जाता है।
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
साइबर एक्सपर्ट्स की साफ सलाह है— किसी भी अनजान कॉल, लिंक, ऐप या मैसेज पर भरोसा न करें। डरें नहीं, सोचें और जांच करें।