Edited By Pardeep,Updated: 28 Apr, 2026 09:13 PM

देश में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न होते ही आम जनता को महंगाई का बड़ा झटका लग सकता है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को चेतावनी दी है कि 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल चुनाव के अंतिम चरण का मतदान खत्म होते ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों...
नई दिल्ली: देश में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न होते ही आम जनता को महंगाई का बड़ा झटका लग सकता है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को चेतावनी दी है कि 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल चुनाव के अंतिम चरण का मतदान खत्म होते ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की जाएगी।
राहुल गांधी का सरकार पर तीखा हमला
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम थीं, तब मोदी सरकार ने मोटा मुनाफा कमाया और अब जब कीमतें बढ़ रही हैं, तो इसका बोझ जनता पर डाला जा रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "चुनावी छूट खत्म, महंगाई की लहर आने वाली है! 29 अप्रैल के बाद पेट्रोल-डीजल महंगा हो जाएगा"। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार सस्ते के समय लूटती है और महंगाई के समय जनता को उनके हाल पर छोड़ देती है,।
तेल कंपनियों को हो रहा भारी नुकसान
सूत्रों के अनुसार, पिछले चार वर्षों से पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि पिछले दो महीनों में ही पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई हैं। इस कारण सरकारी तेल कंपनियों को प्रतिदिन लगभग 2,400 करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी भारी घाटे की वजह से कयास लगाए जा रहे हैं कि चुनाव खत्म होते ही कीमतों में वृद्धि अनिवार्य हो जाएगी।
वैश्विक तनाव का असर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
सरकार ने दी सफाई
हालांकि, इन अटकलों के बीच पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया है कि सरकार के पास फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने इन चर्चाओं को केवल अटकलें बताते हुए खारिज कर दिया है। अब सबकी नजरें 29 अप्रैल के बाद के घटनाक्रम पर टिकी हैं कि क्या वास्तव में सरकार तेल की कीमतों में वृद्धि करेगी या जनता को राहत बरकरार रहेगी।