राज्यसभा में 10 राज्यों की 37 सीटें भरी गईं... बिहार-हरियाणा समेत सभी राज्यों से जानें कौन-कौन बना सांसद?

Edited By Updated: 17 Mar, 2026 09:19 AM

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Rajya Sabha 2026: देश के ऊपरी सदन यानी राज्यसभा की खाली हो रही 37 सीटों के लिए बिछी चुनावी बिसात के नतीजे अब पूरी तरह साफ हो चुके हैं। 10 राज्यों की इन सीटों पर हुए मुकाबले में कहीं तो उम्मीदवारों ने बिना किसी विरोध के संसद का टिकट कटा लिया, लेकिन...

Rajya Sabha 2026: देश के ऊपरी सदन यानी राज्यसभा की खाली हो रही 37 सीटों के लिए बिछी चुनावी बिसात के नतीजे अब पूरी तरह साफ हो चुके हैं। 10 राज्यों की इन सीटों पर हुए मुकाबले में कहीं तो उम्मीदवारों ने बिना किसी विरोध के संसद का टिकट कटा लिया, लेकिन हरियाणा जैसे राज्यों में आधी रात तक चले ड्रामे और आपत्तियों के खेल ने धड़कनें बढ़ाए रखीं। 2 अप्रैल को कार्यकाल खत्म होने से पहले ही अब सदन को अपने नए चेहरे मिल गए हैं।

7 राज्यों में 'क्लीन स्वीप', तीन में कड़ी टक्कर
इस बार चुनाव की तस्वीर दो हिस्सों में बंटी नजर आई। महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल समेत 7 राज्यों में समीकरण इतने स्पष्ट थे कि वहां मतदान की नौबत ही नहीं आई। यहां 26 उम्मीदवारों को निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया गया। असली मुकाबला बिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों पर था, जहां सोमवार सुबह से शुरू हुई वोटिंग शाम तक चली और फिर देर रात तक काउंटिंग का सस्पेंस बना रहा।

बिहार: अपनों की बेरुखी और रणनीति का खेल
बिहार की 5 सीटों पर हुआ मुकाबला सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा। यहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन समेत NDA के 5 दिग्गज मैदान में थे, जबकि महागठबंधन ने अमरेंद्र धारी सिंह पर दांव लगाया था। कागजों पर मुकाबला बराबरी का लग रहा था, लेकिन एनडीए ने बाजी मार ली। दिलचस्प बात यह रही कि महागठबंधन के ही चार विधायकों ने वोटिंग से किनारा कर लिया, जिसका सीधा फायदा एनडीए के शिवेश कुमार को मिला। हालांकि प्रथम वरीयता के वोटों में अमरेंद्र धारी आगे थे, लेकिन दूसरी वरीयता के गणित ने उन्हें रेस से बाहर कर दिया। जीत के बाद मुख्यमंत्री आवास पर जश्न का माहौल दिखा, जहां नीतीश कुमार भावुक भी नजर आए, वहीं तेजस्वी यादव ने अपनी हार के लिए अपनों की 'धोखाधड़ी' को जिम्मेदार ठहराया।

ओडिशा और हरियाणा: क्रॉस वोटिंग और आधी रात का सस्पेंस
ओडिशा में राजनीति की एक अलग ही बिसात बिछी। यहां बीजू जनता दल और कांग्रेस के खेमे में सेंधमारी हुई और क्रॉस वोटिंग की बदौलत भाजपा दो सीटें झटकने में कामयाब रही। पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय ने निर्दलीय उतरकर और भाजपा का समर्थन पाकर सबको चौंका दिया। वहीं हरियाणा में तो स्थिति और भी पेचीदा हो गई। मतपत्रों की गोपनीयता को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच ऐसी कानूनी जंग छिड़ी कि चुनाव आयोग को दखल देना पड़ा। पांच घंटे तक मतगणना रुकी रही और अंततः एक विधायक का वोट अमान्य होने के बाद कांग्रेस के करमवीर सिंह बौद्ध और भाजपा के संजय भाटिया की जीत पर मुहर लगी।

निर्विरोध निर्वाचन: शांति से तय हुआ सफर
इन हंगामों के बीच असम, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चुनावी शोर कम रहा। यहां सीटों के समीकरण स्पष्ट होने के कारण 26 उम्मीदवारों का चुनाव बिना किसी वोटिंग के सर्वसम्मति से हो गया। बंगाल में टीएमसी का दबदबा रहा तो महाराष्ट्र में शरद पवार और रामदास अठावले जैसे दिग्गजों ने अपनी जगह पक्की की। कुल मिलाकर, इन चुनावों ने एक बार फिर दिखाया कि राज्यसभा की राह सिर्फ आंकड़ों से नहीं, बल्कि आखिरी वक्त की रणनीतियों और वफादारियों से होकर गुजरती है।

हरियाणा: एक वोट की अमान्यता और बीजेपी-कांग्रेस की रार
सबसे ज्यादा सुर्खियां हरियाणा के चुनावी दंगल ने बटोरीं। यहां दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में थे, जिससे पेंच फंस गया। बीजेपी ने संजय भाटिया को उतारा था, तो कांग्रेस की ओर से करमवीर सिंह बौद्ध मैदान में थे। मतदान के दौरान 'वोट की गोपनीयता' भंग होने के आरोपों ने दिल्ली तक हलचल मचा दी।

कांग्रेस ने BJP नेता अनिल विज के वोट पर सवाल उठाए, तो बीजेपी ने कांग्रेस विधायकों के मतों को चुनौती दी। अंततः चुनाव आयोग के दखल के बाद कांग्रेस विधायक परमवीर सिंह का वोट अमान्य करार दिया गया, जिसने गेम बदल दिया। अंतिम नतीजों में बीजेपी के संजय भाटिया और कांग्रेस के करमवीर सिंह बौद्ध राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे।

अन्य राज्यों में राज्यसभा चुनाव के नतीजे

हिमाचल प्रदेश (1 सीट)

अनुराग शर्मा — कांग्रेस — निर्विरोध निर्वाचित

तेलंगाना (2 सीटें)

अभिषेक मनु सिंघवी — कांग्रेस — निर्विरोध निर्वाचित

वेम नरेंद्र रेड्डी — कांग्रेस — निर्विरोध निर्वाचित

छत्तीसगढ़ (2 सीटें)

लक्ष्मी वर्मा — भाजपा — निर्विरोध निर्वाचित

फूलो देवी नेताम — भाजपा — निर्विरोध निर्वाचित

असम (3 सीटें)

जोगेन मोहन — भाजपा — निर्विरोध निर्वाचित

तेराश गोवाला — भाजपा — निर्विरोध निर्वाचित

प्रमोद बोरो — यूपीपीएल — निर्विरोध निर्वाचित

तमिलनाडु (6 सीटें)

तिरुचि शिवा — डीएमके — निर्विरोध निर्वाचित

जे. कॉन्स्टैन्टाइन रविंद्रन — डीएमके — निर्विरोध निर्वाचित

एम. थम्बी दुरई — एआईएडीएमके — निर्विरोध निर्वाचित

अंबुमणि रामदॉस — पीएमके — निर्विरोध निर्वाचित

एम. क्रिस्टोफर तिलक — कांग्रेस — निर्विरोध निर्वाचित

एल. के. सुधीश — डीएमडीके — निर्विरोध निर्वाचित

पश्चिम बंगाल (5 सीटें)

बाबुल सुप्रियो — टीएमसी — निर्विरोध निर्वाचित

राजीव कुमार — टीएमसी — निर्विरोध निर्वाचित

मेनका गुरुस्वामी — टीएमसी — निर्विरोध निर्वाचित

कोयल मल्लिक — टीएमसी — निर्विरोध निर्वाचित

राहुल सिन्हा — भाजपा — निर्विरोध निर्वाचित

महाराष्ट्र (7 सीटें)

विनोद तावड़े — भाजपा — निर्विरोध निर्वाचित

रामराव वडकुते — भाजपा — निर्विरोध निर्वाचित

माया इवनाटे — भाजपा — निर्विरोध निर्वाचित

रामदास अठावले — आरपीआई — निर्विरोध निर्वाचित

ज्योति वाघमारे — शिवसेना — निर्विरोध निर्वाचित

पार्थ पवार — एनसीपी — निर्विरोध निर्वाचित

शरद पवार — एनसीपी (एसपी) — निर्विरोध निर्वाचित

हरियाणा (2 सीटें – मुकाबले के बाद परिणाम)

करमवीर सिंह बौद्ध — कांग्रेस

संजय भाटिया — भाजपा

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