भारत में गर्मी बन रही साइलेंट किलर, नई रिसर्च का दावा- भीषण गर्मी से लगभग 3,400 मौतों की आशंका, ये राज्य खतरे के निशान पर

Edited By Updated: 02 Jun, 2026 03:09 PM

research claims that around 3 400 deaths could be expected due to extreme heat

देश के कई हिस्सों में इस साल भी भीषण गर्मी लोगों के लिए परेशानी बनी हुई है। मई और जून के दौरान कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है। इस बीच एक नई रिसर्च बताती है कि वास्तविक स्थिति कहीं अधिक गंभीर हो सकती है। स्टडी के...

नई दिल्ली: देश के कई हिस्सों में इस साल भी भीषण गर्मी लोगों के लिए परेशानी बनी हुई है। मई और जून के दौरान कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है। इस बीच एक नई रिसर्च बताती है कि वास्तविक स्थिति कहीं अधिक गंभीर हो सकती है। स्टडी के अनुसार, भारत में हद से ज्यादा गर्मी का सिर्फ एक दिन ही लगभग 3,400 अतिरिक्त मौतों का कारण बन सकता है। वहीं यदि लगातार पांच दिनों तक हीटवेव जैसी स्थिति बनी रहे तो यह आंकड़ा 30,000 तक पहुंच सकता है।

गर्मी से होने वाली मौतों का सही आंकड़ा नहीं आता सामने
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी से प्रभावित कई मौतें सीधे तौर पर हीटस्ट्रोक के रूप में दर्ज नहीं होतीं। अक्सर लोगों की मौत हार्ट अटैक, सांस संबंधी बीमारी, डिहाइड्रेशन या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के रूप में दर्ज होती है, जबकि इन समस्याओं को बढ़ाने में अत्यधिक गर्मी की बड़ी भूमिका होती है। यही वजह है कि गर्मी का वास्तविक असर आधिकारिक आंकड़ों में पूरी तरह दिखाई नहीं देता।

देशभर के आंकड़ों का किया गया Analysis
रिसर्च में भारत के 10 शहरों से जुड़े पुराने अध्ययनों के आंकड़ों का उपयोग किया गया और फिर पूरे देश के जिलों पर इसका अनुमान लगाया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि अत्यधिक तापमान का असर सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी खतरा तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण इलाकों में लोगों के पास गर्मी से बचाव के साधन कम होते हैं, इसलिए वास्तविक मौतों की संख्या अनुमान से भी अधिक हो सकती है।

भारत के ये राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित
इस वर्ष दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और अन्य कई राज्यों में गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़े हैं। कुछ इलाकों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है। गर्मी के साथ-साथ रात के समय बढ़ता तापमान भी चिंता का विषय बन गया है। पहले रात में लोगों को कुछ राहत मिल जाती थी, लेकिन अब शहरी क्षेत्रों में कंक्रीट और इमारतों के कारण गर्मी देर रात तक बनी रहती है।

किसे सबसे ज्यादा खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार निम्न वर्ग सबसे ज्यादा जोखिम में है:
-खेतों में काम करने वाले किसान
-निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूर
-बुजुर्ग नागरिक
-छोटे बच्चे
-पहले से बीमार लोग
-खुले वातावरण में लंबे समय तक रहने वाले लोग
-उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा असर का अनुमान

 ये राज्य खतरे के निशान पर
रिसर्च के अनुसार यदि 5 दिन तक गंभीर हीटवेव बनी रहती है तो अकेले उत्तर प्रदेश में 8,000 से अधिक अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। वहीं अहमदाबाद, जयपुर और सूरत जैसे शहरों में एक दिन की अत्यधिक गर्मी से 250 से ज्यादा अतिरिक्त मौतें होने का अनुमान लगाया गया है।

जलवायु परिवर्तन बढ़ा रहा खतरा
वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण आने वाले वर्षों में हीटवेव की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। तापमान के नए रिकॉर्ड बनना अब असामान्य नहीं रह गया है।

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