बीच समुद्र बदला रूट, चीन जा रहा रूसी तेल अचानक भारत की ओर मुड़ा, ड्रैगन को झटका!

Edited By Updated: 18 Mar, 2026 06:10 PM

russian oil bound for china suddenly turns toward india

वैश्विक तनाव के बीच कच्चे तेल के बाजार में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस से लाखों बैरल कच्चा तेल लेकर चीन जा रहे कई तेल टैंकरों ने बीच समुद्र में ही अपना रास्ता बदल लिया है और अब वे भारत के बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं।...

बिजनेस डेस्कः वैश्विक तनाव के बीच कच्चे तेल के बाजार में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस से लाखों बैरल कच्चा तेल लेकर चीन जा रहे कई तेल टैंकरों ने बीच समुद्र में ही अपना रास्ता बदल लिया है और अब वे भारत के बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। इसे वैश्विक ऊर्जा व्यापार में बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

बीच समुद्र में बदला रूट

शिप-ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक ‘एक्वा टाइटन’ नाम का एक विशाल टैंकर जनवरी के अंत में रूस के बाल्टिक सागर से ‘यूराल्स’ कच्चा तेल लेकर चीन के रिझाओ बंदरगाह के लिए निकला था लेकिन मार्च के मध्य में दक्षिण-पूर्व एशियाई जलक्षेत्र में पहुंचने के बाद इसने अचानक दिशा बदल ली। अब यह 21 मार्च को भारत के न्यू मैंगलोर बंदरगाह पहुंचने वाला है। 

यह अकेला मामला नहीं है। डेटा के अनुसार, कम से कम सात टैंकर ऐसे हैं जिन्होंने चीन की बजाय भारत की ओर रुख कर लिया है। वहीं ‘ज़ौज़ू एन’ नाम का एक अन्य टैंकर, जो कजाकिस्तान का ‘सीपीसी ब्लेंड’ क्रूड लेकर चीन जा रहा था, उसने भी बीच रास्ते से मुड़कर भारत आने का फैसला किया है और इसके 25 मार्च को गुजरात के सिक्का बंदरगाह पहुंचने की संभावना है।

क्यों बदला जहाजों का रास्ता?

इस बड़े बदलाव की मुख्य वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और तेल आपूर्ति पर उसका असर है। ईरान से जुड़े संघर्ष के चलते भारत को मिलने वाली पारंपरिक तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। ऐसे में ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत ने तेजी से वैकल्पिक स्रोतों की ओर रुख किया है।

बताया जा रहा है कि इस स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने भी भारत को अस्थायी तौर पर रूस से तेल खरीद बढ़ाने की छूट दी है। इसके बाद भारतीय रिफाइनरियों ने तेजी दिखाते हुए एक ही हफ्ते में करीब 3 करोड़ बैरल तेल खरीद लिया।

चीन को लगा झटका

हाल के महीनों में जब भारत ने रूस से तेल खरीद घटाई थी, तब चीन रूस का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था लेकिन अब टैंकरों का भारत की ओर मुड़ना चीन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी अब रूस से तेल खरीद फिर से बढ़ा सकते हैं। इससे आने वाले समय में चीन को मिलने वाली सप्लाई और घट सकती है।

बदलता वैश्विक समीकरण

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम सिर्फ तेल आपूर्ति का बदलाव नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और व्यापारिक समीकरणों में हो रहे बड़े बदलाव का संकेत है। आने वाले दिनों में इसका असर कच्चे तेल की कीमतों और ऊर्जा बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।
 

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