Edited By Radhika,Updated: 17 Mar, 2026 03:49 PM

Child Adoption पर SC ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने 'मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट' के उस प्रावधान को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है, जिसमें केवल 3 महीने तक के बच्चे को गोद लेने पर ही Maternity Leave देने की शर्त थी। अदालत ने इसे...
नेशनल डेस्क: Child Adoption पर SC ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने 'मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट' के उस प्रावधान को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है, जिसमें केवल 3 महीने तक के बच्चे को गोद लेने पर ही Maternity Leave देने की शर्त थी। अदालत ने इसे समानता के अधिकार का उल्लंघन माना है।

क्या था पुराना कानून और कोर्ट ने क्या कहा?
सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 और मैटरनिटी बेनिफिट (संशोधन) एक्ट 2017 के तहत, यदि कोई महिला 3 महीने से अधिक उम्र का बच्चा गोद लेती थी, तो उसे कानूनी रूप से छुट्टी पाने का अधिकार नहीं था। इस पर जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने साफ किया है कि बच्चे की उम्र चाहे जो भी हो, गोद लेने वाली हर मां को 12 हफ्ते की छुट्टी मिलनी चाहिए। तर्क देते हुए कोर्ट ने कहा है कि बच्चे की उम्र से उसकी देखभाल की जरूरतों में बदलाव नहीं आता। मां की जिम्मेदारियां हर उम्र के बच्चे के लिए समान होती हैं। जिस दिन से बच्चा कानूनी रूप से गोद लिया जाएगा, उसी तारीख से मां छुट्टी की हकदार होगी।

Paternity Leave पर केंद्र को सुझाव
अदालत ने केवल महिलाओं ही नहीं, बल्कि पिताओं के अधिकारों पर भी बात की। कोर्ट ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि 'पितृत्व अवकाश' को एक सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में मान्यता देने वाला कानून लाया जाए। बेंच ने कहा कि माता-पिता की जरूरतों के अनुरूप इस छुट्टी की अवधि निर्धारित होनी चाहिए ताकि बच्चे के पालन-पोषण में दोनों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
असल में क्या था पूरा मामला
यह फैसला 2021 में दायर एक जनहित याचिका पर आया है, जिसमें 2017 के अधिनियम की धारा 5(4) को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता महिला, जिन्होंने खुद दो बच्चे गोद लिए थे, ने तर्क दिया था कि उम्र के आधार पर छुट्टियों का निर्धारण भेदभावपूर्ण है। नवंबर 2024 में इस पर केंद्र को नोटिस जारी किया गया था, जिसके बाद अब कोर्ट ने इस विसंगति को दूर कर दिया है।