Edited By Radhika,Updated: 18 Mar, 2026 05:49 PM

भारत की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि वह 'पैटरनिटी लीव' को एक सामाजिक सुरक्षा लाभ यानि की Social Security Benefit के रूप में मान्यता देने के लिए कानून लाने पर विचार किया जाए। कोर्ट का मानना है कि बच्चे के विकास में...
Paternity Leave: भारत की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि वह 'पैटरनिटी लीव' को एक सामाजिक सुरक्षा लाभ यानि की Social Security Benefit के रूप में मान्यता देने के लिए कानून लाने पर विचार किया जाए। कोर्ट का मानना है कि बच्चे के विकास में पिता की भूमिका को नजरअंदाज करना न केवल गलत है, बल्कि अन्यायपूर्ण भी है।

कोर्ट ने रखी ये बड़ी बातें
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कई अहम बिंदुओं पर जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि समाज अक्सर मां की भूमिका को ही अनिवार्य मानता है, लेकिन बच्चे के भावनात्मक और मानसिक विकास में पिता का योगदान भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पैटरनिटी लीव का प्रावधान रूढ़िवादी जेंडर भूमिकाओं को तोड़ने में मदद करेगा और कार्यस्थल पर समानता को बढ़ावा देगा। बच्चे को पालना किसी एक की नहीं, बल्कि माता-पिता दोनों की 'साझा जिम्मेदारी' है।

गोद लेने वाली माताओं के लिए भी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिन यह फैसला दिया है अब गोद लेने वाली मां को 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलेगा, चाहे बच्चे की उम्र कुछ भी हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चे और मां के बीच जुड़ाव के लिए यह अवकाश अनिवार्य है।
केंद्र सरकार से अनुरोध
बेंच ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह ऐसा प्रावधान लाए जिससे पिता को भी अवकाश मिल सके। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस अवकाश की अवधि ऐसी होनी चाहिए जो माता-पिता और बच्चे दोनों की जरूरतों के अनुकूल हो।