Edited By Radhika,Updated: 20 Mar, 2026 12:22 PM

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद भारत की कूटनीतिक चुप्पी पर राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस सांसद और पूर्व राजनयिक शशि थरूर ने केंद्र सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा है कि भारत को इस मामले में तुरंत शोक संवेदना व्यक्त करनी...
नेशनल डेस्क: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद भारत की कूटनीतिक चुप्पी पर राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस सांसद और पूर्व राजनयिक शशि थरूर ने केंद्र सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा है कि भारत को इस मामले में तुरंत शोक संवेदना व्यक्त करनी चाहिए थी।
निंदा और संवेदना में फर्क होता है
ANI से बातचीत करते हुए शशि थरूर ने कहा कि भले ही भारत सरकार अमेरिकी-इजरायली हमले की 'निंदा' न करना चाहे, लेकिन 'शोक' जताना एक कूटनीतिक शिष्टाचार है। "मैं उन आलोचकों से सहमत हूँ जो कह रहे हैं कि भारत को खामेनेई की मृत्यु पर तुरंत शोक व्यक्त करना चाहिए था। यह देश में उनकी भूमिका को देखते हुए सबसे उचित कदम होता। शोक व्यक्त करना केवल पीड़ित पक्ष और वहां के लोगों के प्रति सहानुभूति का भाव है, इसे राजनीतिक निंदा से अलग देखा जाना चाहिए।"
पुराने वाकये का दिया हवाला
थरूर ने साल 2024 की याद दिलाते हुए कहा कि जब पूर्व ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मृत्यु हुई थी, तब भारत ने तुरंत राजकीय शोक की घोषणा की थी। उन्होंने खुशी जताई कि इस बार दिल्ली में ईरानी दूतावास में शोक पुस्तिका खुलने पर भारत ने अपने विदेश सचिव को भेजा, लेकिन औपचारिक संवेदना में देरी पर सवाल उठाए।
विपक्ष का नैतिक स्टैंड vs सरकार का संयम
अपनी पार्टी (कांग्रेस) के स्टैंड और सरकार की भूमिका पर थरूर ने संतुलित राय रखी:
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विपक्ष की भूमिका: सोनिया गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं का नैतिक स्टैंड सही है।
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सरकार को सलाह: थरूर ने कहा कि वह कांग्रेस सरकार को भी यही सलाह देते कि ऐसे युद्ध के समय 'संयम ही शक्ति' है। संयम का अर्थ आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि अपने हितों की रक्षा करना है।