जम्मू-कश्मीर के बजट में पुराने श्रीनगर के लिए अलग से प्रावधान किए जाएं : महबूबा

Edited By Updated: 01 Feb, 2026 06:23 PM

special demand mehbooba mufti seeks separate budget for old srinagar

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने रविवार को कहा कि जम्मू कश्मीर सरकार द्वारा अगले वित्त वर्ष के लिए पेश किए जाने वाले बजट में पुराने श्रीनगर शहर के विकास से अलग से प्रावधान किया जाना चाहिए। श्रीनगर के पुराने इलाके को...

नेशनल डेस्क: पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने रविवार को कहा कि जम्मू कश्मीर सरकार द्वारा अगले वित्त वर्ष के लिए पेश किए जाने वाले बजट में पुराने श्रीनगर शहर के विकास से अलग से प्रावधान किया जाना चाहिए। श्रीनगर के पुराने इलाके को 'शहर-ए-खास' के नाम से भी जाना जाता है। जम्मू कश्मीर विधानसभा का बजट सत्र सोमवार को उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के संबोधन के साथ शुरू होगा। केंद्र शासित प्रदेश के वित्त विभाग की भी जिम्मेदारी संभाल रहे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला छह फरवरी को वार्षिक बजट पेश करेंगे।

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महबूबा ने श्रीनगर के बाबादेम्ब-खानयार इलाके में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, ''शहर-ए-खास की अपनी समस्याएं हैं और इस क्षेत्र के विकास के लिए विशेष रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला एक अलग बजटीय प्रावधान होना चाहिए।'' पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि शहर-ए-खास में अधिकतर लोग सामान्य वर्ग में आते हैं और उन्हें सरकारी नौकरियों या अन्य संस्थानों में आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है। महबूबा ने कहा, ''अधिकतर लोग या तो हस्तशिल्प से जुड़े हैं या पर्यटन से। मशीन से बने उत्पादों के कारण हस्तशिल्प खतरे में है, जिसके परिणामस्वरूप कारीगरों की आय में कमी आई है।''

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महबूबा ने रविवार को पीडीपी के संवाद कार्यक्रम में अपनी बात रखने वाले युवा लड़के-लड़कियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि 'जेन जेड' (उन लोगों को कहा जाता है जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है) ने यह साबित कर दिया है कि उन्हें विभिन्न मुद्दों की जानकारी है, जो पिछली पीढ़ियों के पास शायद नहीं थी। पीडीपी अध्यक्ष ने कहा कि संवादात्मक सत्र को मीडिया की नजरों से दूर रखा गया क्योंकि लोग कैमरों की मौजूदगी में खुलकर बोलने से कतराते हैं। उन्होंने कहा, ''वे इस बात से डरते हैं कि अगर वे अपने दिल की बात कहेंगे तो उन्हें सरकार से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दुर्भाग्य से, सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी अंकुश लगाना चाहती है।'' 

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