Edited By Mansa Devi,Updated: 21 Jan, 2026 03:09 PM

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने बुधवार को कहा कि बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के घाटे को कम करने के लिए लागत-अनुरूप शुल्क की अवधारणा को विद्युत संशोधन विधेयक में शामिल किया गया है। इसे आगामी बजट सत्र में पेश किया जा सकता है। देश में लंबे समय से कर्ज...
नेशनल डेस्क: केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने बुधवार को कहा कि बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के घाटे को कम करने के लिए लागत-अनुरूप शुल्क की अवधारणा को विद्युत संशोधन विधेयक में शामिल किया गया है। इसे आगामी बजट सत्र में पेश किया जा सकता है। देश में लंबे समय से कर्ज में डूबी और घाटे में चल रही बिजली वितरण कंपनियों की पृष्ठभूमि में लागत-अनुरूप शुल्क का महत्व बढ़ जाता है। अखिल भारतीय बिजली वितरण कंपनियों के संघ (एआईडीए) के पहले वार्षिक सम्मेलन ‘ईडीआईसीओएन 2026' को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि बिजली आपूर्ति मूल्य श्रृंखला—उत्पादन, पारेषण एवं वितरण में बिजली वितरण कंपनियां एक अहम कड़ी हैं।
विद्युत मंत्री ने कहा कि बिजली वितरण कंपनियां उपभोक्ताओं को प्रत्यक्ष रूप से ‘बी2सी' (व्यवसाय-से-उपभोक्ता) सेवाएं प्रदान करती हैं और सेवा गुणवत्ता तथा अन्य मुद्दों पर ग्राहकों की शिकायतें सबसे पहले इन्हीं के पास आती हैं। मनोहर लाल ने कहा, “हम बिजली वितरण कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए लागत-अनुरूप शुल्क का प्रावधान ला रहे हैं। इसमें बिजली आपूर्ति से जुड़ी सभी लागतों को शुल्क में शामिल किया जाएगा, जिससे बिजली वितरण कंपनियों के घाटे कम होंगे। यह विधेयक संसद के इस (बजट) सत्र में लाया जा सकता है। इसके सुचारु पारित होने के लिए सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा।''
उन्होंने बताया कि मसौदा राष्ट्रीय विद्युत नीति 2026 में भी बिजली वितरण कंपनियों के घाटे तथा कर्ज को कम करने के लिए लागत-अनुरूप शुल्क का प्रावधान किया गया है। विद्युत मंत्रालय ने हितधारकों से बुधवार को इस पर सुझाव मांगे हैं। मंत्री ने कहा कि लागत-अनुरूप शुल्क से बिजली वितरण कंपनियों को लाभ कमाने में मदद मिलेगी जिसका उपयोग ‘क्रॉस-सब्सिडी' के लिए किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ‘क्रॉस-सब्सिडी' नियमों के अनुसार ही दी जानी चाहिए।
मंत्रालय ने कहा कि मसौदे में बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के नुकसान व कर्ज, लागत-अनुरूप न होने वाली दरों तथा अधिक ‘क्रॉस-सब्सिडी' जैसी समस्याओं से निपटने पर जोर दिया गया है। लागत-अनुरूप न होने वाली दर' वह होती है जिसमें किसी उपभोक्ता वर्ग से वसूली गई दर बिजली के उत्पादन, पारेषण एवं वितरण की औसत लागत से कम होती है। वहीं ‘क्रॉस-सब्सिडी' ऐसी व्यवस्था है जिसमें औद्योगिक, वाणिज्यिक एवं उच्च आय वाले घरेलू उपभोक्ताओं से लागत से अधिक शुल्क लेकर कृषि उपभोक्ताओं तथा कम आय वाले परिवारों को दी जाने वाली कम दरों की भरपाई की जाती है।
मंत्रालय ने बयान में कहा कि मसौदा नीति का उद्देश्य प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना, परिवर्तनीय नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी को समाहित करने के लिए ग्रिड की मजबूती सुनिश्चित करना और मांग-पक्षीय उपायों के साथ उपभोक्ता-केंद्रित सेवाएं प्रदान करना है। हितधारक अपनी टिप्पणियां 30 दिन के भीतर प्रस्तुत कर सकते हैं।