Edited By Anu Malhotra,Updated: 30 Jan, 2026 09:00 AM
राजस्थान की 25 वर्षीय कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की बुधवार शाम हुई मौत अब सिर्फ एक संदिग्ध मृत्यु नहीं रह गई है, बल्कि यह मामला कई अनुत्तरित सवालों और गंभीर आरोपों में उलझता जा रहा है। साध्वी को उनके पिता ब्रह्मनाथ और एक अन्य व्यक्ति बुधवार शाम करीब...
नई दिल्ली: राजस्थान की 25 वर्षीय कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की बुधवार शाम हुई मौत अब सिर्फ एक संदिग्ध मृत्यु नहीं रह गई है, बल्कि यह मामला कई अनुत्तरित सवालों और गंभीर आरोपों में उलझता जा रहा है। साध्वी को उनके पिता ब्रह्मनाथ और एक अन्य व्यक्ति बुधवार शाम करीब 5:45 बजे अचेत अवस्था में अस्पताल लेकर पहुंचे थे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मौत के बाद से ही साध्वी के समर्थक पिता और जोधपुर स्थित आश्रम की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहे हैं। समर्थकों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और इसकी सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में करवाई जाए। वहीं, पिता का दावा है कि उनकी बेटी की जान एक गलत इंजेक्शन के कारण गई।
खांसी-जुकाम के इलाज के बाद बिगड़ी हालत
जानकारी के मुताबिक, साध्वी को खांसी और जुकाम की शिकायत थी। इसी वजह से आश्रम में एक निजी कंपाउंडर को बुलाया गया। आरोप है कि कंपाउंडर द्वारा इंजेक्शन लगाए जाने के मात्र पांच मिनट बाद ही साध्वी की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्होंने दम तोड़ दिया। प्रशासन की ओर से अब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। पोस्टमार्टम के बाद शव को जोधपुर जिले के जास्ती गांव ले जाया गया, जहां शुक्रवार को समाधि दी जानी है।
मौत के बाद इंस्टाग्राम पोस्ट ने बढ़ाया रहस्य
इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब यह सामने आया कि साध्वी की मौत बुधवार शाम करीब साढ़े पांच बजे हो चुकी थी, लेकिन उसी रात करीब साढ़े नौ बजे उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से “अग्निपरीक्षा” और “अलविदा” शीर्षक के संदेश पोस्ट किए गए। इन पोस्ट्स में लिखा गया था—“जीते जी न्याय नहीं मिला, मेरे जाने के बाद तो न्याय मिलेगा।” इन संदेशों को लेकर सवाल उठे कि मौत के बाद सोशल मीडिया पर यह पोस्ट किसने डाली। पिता ने स्वीकार किया है कि साध्वी के मोबाइल फोन से यह संदेश भेजा गया था और किसी साथी गुरु महाराज द्वारा पोस्ट किया गया।
पोस्टमार्टम को लेकर रातभर हंगामा
साध्वी की मौत की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में समर्थक बुधवार रात आश्रम पहुंच गए। उस समय पिता शव लेकर बाहर खड़े थे। समर्थकों की मांग थी कि पोस्टमार्टम मथुरादास माथुर सरकारी अस्पताल में कराया जाए, लेकिन पिता इसके लिए तैयार नहीं थे।
इसी बात को लेकर माहौल तनावपूर्ण हो गया और समर्थकों ने हंगामा शुरू कर दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के बाद पुलिस ने देर रात करीब एक बजे शव को सरकारी अस्पताल भिजवाया, जहां गुरुवार को पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम के दौरान भी तनाव बना रहा। समर्थक रिपोर्ट सार्वजनिक करने और पिता के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते रहे। पुलिस को हस्तक्षेप कर स्थिति संभालनी पड़ी।
मोबाइल फोन भी बना जांच का अहम हिस्सा
मामले में एक और गंभीर पहलू यह है कि शुरुआत में पिता ने साध्वी का मोबाइल फोन पुलिस को नहीं सौंपा। बाद में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त छवि शर्मा ने मोबाइल अपने कब्जे में लिया। अब मोबाइल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों की फॉरेंसिक जांच करवाई जाएगी।
देरी पर उठे गंभीर आरोप
समर्थकों का आरोप है कि बुधवार दोपहर करीब 12 बजे पिता ने एक निजी अस्पताल के कंपाउंडर को फोन किया था। सवाल यह उठ रहा है कि अगर गलत इंजेक्शन से साध्वी की हालत बिगड़ी, तो उन्हें करीब साढ़े पांच घंटे तक आश्रम में ही क्यों रखा गया। गंभीर स्थिति में तुरंत जोधपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया।
छह महीने पुराना विवाद फिर चर्चा में
इस पूरे मामले के बीच जुलाई 2025 का एक पुराना विवाद भी दोबारा सामने आया है। उस समय आश्रम के एक पूर्व कर्मचारी पर साध्वी को ब्लैकमेल करने का आरोप लगा था। आरोप था कि उस व्यक्ति ने साध्वी और उनके पिता का एक वीडियो वायरल किया, जिसमें साध्वी अपने पिता के गले लगी नजर आ रही थीं।
इस वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद साध्वी मानसिक रूप से परेशान रहने लगी थीं। आरोप है कि इसी वीडियो के जरिए पूर्व कर्मचारी उनसे 20 लाख रुपये की मांग कर रहा था। इस मामले को लेकर पहले ही पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई जा चुकी थी।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आई सामने
नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि एक युवा कथावाचक की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की सच्चाई सामने आनी चाहिए।