LPG Booking: सिलेंडर बुक करने के इतने दिन बाद होगी डिलीवरी, देखें नए नियम

Edited By Updated: 18 Mar, 2026 06:27 PM

lpg gas delivery will be done in 3 days

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत में एलपीजी गैस को लेकर चिंता बढ़ी है, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई कमी नहीं है। लोगों से अनावश्यक बुकिंग न करने की अपील की गई है। नए नियमों के तहत शहरी क्षेत्रों में 25 दिन और ग्रामीण इलाकों में 45 दिन...

नेशनल डेस्कः मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत में एलपीजी गैस को लेकर अफवाहों और चिंता का माहौल बन गया है। हालांकि केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि देश में गैस, पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। इसके साथ ही सरकार ने एलपीजी सिलेंडर बुकिंग और डिलीवरी से जुड़े नियमों को लेकर भी अहम जानकारी साझा की है, ताकि उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति न रहे। डिलीवरी को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं। नियमों के मुताबिक, सिलेंडर बुकिंग के बाद 2 से 3 दिनों के भीतर उसकी डिलीवरी उपभोक्ता तक पहुंच जानी चाहिए।

 

सरकार ने आम जनता से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और जरूरत से ज्यादा गैस सिलेंडर बुक करने से बचें। अधिकारियों का कहना है कि अनावश्यक बुकिंग से सप्लाई चेन पर दबाव पड़ता है, जिससे वास्तविक जरूरतमंद उपभोक्ताओं को दिक्कत हो सकती है।

सिलेंडर बुकिंग के नियमों में बदलाव

इसी बीच एलपीजी सिलेंडर बुकिंग से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। नए नियमों के तहत अब एक सिलेंडर बुक करने के तुरंत बाद दूसरा सिलेंडर बुक नहीं किया जा सकेगा। शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ता को अगली बुकिंग के लिए कम से कम 25 दिन का इंतजार करना होगा, जबकि पहले यह अवधि 21 दिन थी। वहीं ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में यह अंतराल 45 दिन निर्धारित किया गया है। सरकार के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य अनावश्यक और बार-बार की जा रही बुकिंग पर नियंत्रण करना है, ताकि सभी उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध हो सके।

डिलीवरी को लेकर नियम

डिलीवरी को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं। नियमों के मुताबिक, सिलेंडर बुकिंग के बाद 2 से 3 दिनों के भीतर उसकी डिलीवरी उपभोक्ता तक पहुंच जानी चाहिए। इसके अलावा, गैस सिलेंडर की डिलीवरी प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए ओटीपी सिस्टम लागू किया गया है। अब अधिकांश क्षेत्रों में उपभोक्ता के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा जाता है, जिसे डिलीवरी के समय बताना अनिवार्य होता है। ओटीपी सत्यापन के बाद ही डिलीवरी को पूर्ण माना जाता है।

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