Edited By Anu Malhotra,Updated: 28 Feb, 2026 10:26 AM

सरकारी गलियारों में इन दिनों 8वें वेतन आयोग को लेकर हलचल तेज है। लाखों केंद्रीय कर्मचारी अपनी सैलरी में होने वाले संभावित इजाफे का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच, डाक कर्मचारी संगठन (Postal Employee Body) की एक ताजा मांग ने इस चर्चा को और हवा...
नेशनल डेस्क: सरकारी गलियारों में इन दिनों 8वें वेतन आयोग को लेकर हलचल तेज है। लाखों केंद्रीय कर्मचारी अपनी सैलरी में होने वाले संभावित इजाफे का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसी बीच, डाक कर्मचारी संगठन (Postal Employee Body) की एक ताजा मांग ने इस चर्चा को और हवा दे दी है। अगर यह प्रस्ताव हकीकत बनता है, तो कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी और रिटायरमेंट बेनिफिट्स में जबरदस्त उछाल देखने को मिल सकता है।
डाक कर्मचारी संगठन की बड़ी मांग
हाल ही में Postal Employee Body ने 8th Pay Commission के चेयरमैन को एक औपचारिक पत्र लिखा है। इस पत्र की मुख्य मांग यह है कि वर्तमान में मिल रहे 50% महंगाई भत्ते (DA) को कर्मचारियों की मूल सैलरी (Basic Pay) में शामिल (Merge) कर दिया जाए। आमतौर पर यह माना जाता है कि जब महंगाई का स्तर एक सीमा को पार कर जाता है, तो भत्ते को वेतन का हिस्सा बना देना चाहिए ताकि कर्मचारियों की क्रय शक्ति बनी रहे।
सैलरी पर क्या होगा असर? (गणित समझिए)
DA को बेसिक पे में मर्ज करने की मांग सिर्फ एक तकनीकी बदलाव नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा वित्तीय लाभ छिपा है:
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भत्तों में बढ़ोतरी: मकान किराया भत्ता (HRA) और यात्रा भत्ता (TA) जैसे तमाम अलाउंस 'बेसिक पे' के आधार पर तय होते हैं। अगर बेसिक पे बढ़ेगी, तो ये सभी भत्ते खुद-ब-खुद बढ़ जाएंगे।
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पेंशन का फायदा: रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन की गणना भी अंतिम बेसिक पे पर आधारित होती है, जिससे पेंशनरों को भी बड़ा लाभ होगा।
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salary structure: इससे वेतन ढांचा अधिक पारदर्शी और महंगाई के अनुरूप संतुलित हो जाता है।
क्या सरकार इसे स्वीकार करेगी?
हालांकि डाक कर्मचारियों का यह प्रस्ताव तार्किक लगता है, लेकिन अंतिम फैसला सरकार की तिजोरी और राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) के गणित पर निर्भर करेगा। वेतन आयोग की प्रक्रिया काफी लंबी और विस्तृत होती है। सरकार को न केवल वर्तमान कर्मचारियों, बल्कि लाखों पेंशनभोगियों के बजट का भी आकलन करना पड़ता है। फिलहाल, यह एक मजबूत प्रस्ताव है जिसे आयोग के सामने रखा गया है। अब गेंद सरकार और आयोग के पाले में है कि वे कर्मचारियों की इस उम्मीद को कितनी गंभीरता से लेते हैं।