बिना पर्चे की सर्दी-खांसी की दवाएं खाना कितना है जोखिम भरा? हो सकती है ये जानलेवा बीमारियां

Edited By Updated: 02 Feb, 2026 04:22 PM

taking cold and cough medicines without prescription these diseases can be fatal

सर्दियों में सर्दी, खांसी और जुकाम आम हैं, लेकिन लोग अक्सर डॉक्टर से सलाह लिए बिना मेडिकल स्टोर से दवा ले लेते हैं। डिकंजेस्टेंट, एंटीहिस्टामिन, खांसी दबाने वाली दवाएं और दर्द-बुखार की गोलियां बिना पर्चे के लेने से सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है।...

नेशनल डेस्क : सर्दियों के मौसम में सर्दी, जुकाम और खांसी होना आम बात है। ऐसे में अक्सर लोग डॉक्टर के पास जाने के बजाय सीधे मेडिकल स्टोर से बिना पर्चे की दवाएं खरीद लेते हैं। रंग-बिरनी पैकिंग और 'तुरंत राहत' जैसे दावे इन दवाओं को और भरोसेमंद बना देते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि बिना डॉक्टर की सलाह ली गई ये दवाएं कई बार सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।

बिना पर्चे मिलने वाली दवाएं क्यों हो सकती हैं खतरनाक

सर्दी-खांसी में आमतौर पर डिकंजेस्टेंट (Decongestant), एंटीहिस्टामिन (Antihistamine), खांसी दबाने वाली सिरप और दर्द-बुखार की गोलियां ली जाती हैं। लोग इनके साइड इफेक्ट्स जाने बिना ही इन्हें खा लेते हैं और कई बार घर में इनका स्टॉक भी रख लेते हैं। फार्मेसी और मेडिकल विशेषज्ञों के मुताबिक, ये दवाएं शरीर पर गहरा असर डाल सकती हैं, खासकर तब जब कोई व्यक्ति पहले से दूसरी दवाएं ले रहा हो। इससे दवाओं के आपसी रिएक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

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डिकंजेस्टेंट और एंटीहिस्टामिन के नुकसान

डिकंजेस्टेंट दवाएं नाक की सूजन कम करके सांस लेने में राहत देती हैं, लेकिन इन्हें ज्यादा दिनों तक लेने से उल्टा असर हो सकता है। इससे नाक की सूजन और बढ़ सकती है। इसके अलावा ब्लड प्रेशर बढ़ना, दिल की धड़कन तेज होना, बेचैनी और नींद न आना जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। हाई ब्लड प्रेशर, दिल के मरीज, डायबिटीज या स्ट्रोक से पीड़ित लोगों के लिए ये दवाएं ज्यादा जोखिम भरी होती हैं।

एंटीहिस्टामिन छींक और नाक बहने में राहत तो देती हैं, लेकिन ये दिमाग को सुस्त कर सकती हैं। बुजुर्गों में इससे चक्कर आना, भ्रम की स्थिति और गिरने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए बिना सलाह इन्हें लेना सुरक्षित नहीं माना जाता।

दिमाग, लिवर, किडनी और दिल पर असर

खांसी दबाने वाली दवाओं में मौजूद डेक्सट्रोमेथॉर्फन का गलत या ज्यादा इस्तेमाल दिमाग पर बुरा असर डाल सकता है। इससे चक्कर, उलझन, अजीब व्यवहार और मूड में बदलाव हो सकता है। वहीं पैरासिटामोल और इबुप्रोफेन जैसी आम दर्द-बुखार की दवाएं जरूरत से ज्यादा लेने पर लिवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं। कुछ मामलों में पेट में खून बहने और दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है।

कॉम्बिनेशन दवाओं से ज्यादा खतरा

डेक्विल, न्यूक्विल जैसी कॉम्बिनेशन दवाओं में एक साथ कई दवाएं मिली होती हैं। समस्या यह है कि मरीज को अक्सर सभी दवाओं की जरूरत नहीं होती, फिर भी वह पूरा कॉम्बिनेशन ले लेता है। इससे शरीर में कुछ दवाएं जरूरत से ज्यादा पहुंच जाती हैं और धीरे-धीरे नुकसान करती रहती हैं, जिसका असर बाद में गंभीर बीमारी के रूप में सामने आता है।

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डॉक्टर की सलाह क्यों जरूरी है

डॉक्टरों का कहना है कि आजकल लोग इंटरनेट या दूसरों की सलाह पर खुद ही दवाएं लेने लगते हैं, जो बेहद खतरनाक आदत है। हर इंसान का शरीर अलग होता है और उसकी उम्र, बीमारी और पहले से चल रही दवाओं के हिसाब से इलाज तय किया जाता है। बिना सलाह दवा लेना छोटी गलती लग सकती है, लेकिन यह बड़ी परेशानी जानलेवा भी साबित हो सकती है।

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