Edited By Mehak,Updated: 21 Jan, 2026 03:43 PM

नई डाइट गाइडलाइंस और विशेषज्ञों की राय के अनुसार, रेड मीट जैसे मटन को पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है, लेकिन सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए। डॉक्टरों का कहना है कि हफ्ते में एक बार या 10–15 दिन में मटन खाना सुरक्षित माना जाता है। ज्यादा सेवन से बैड...
नेशनल डेस्क : कई दशकों से लोगों को यह सिखाया जाता रहा कि घी, मक्खन और लाल मांस सेहत के लिए नुकसानदेह हैं, लेकिन साल 2026 की शुरुआत में अमेरिका की नई डाइटरी गाइडलाइंस ने इस सोच को चुनौती दी है। अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग (HHS) ने 2025-2030 के लिए नई डाइटरी गाइडलाइंस जारी की हैं, जिनमें सैचुरेटेड फैट को लेकर पुराने नजरिए में बड़ा बदलाव दिखता है।
एक अमेरिकी हेल्थ सेक्रेटरी ने कहा कि अब घी, मक्खन और फुल-फैट डेयरी को पूरी तरह दोषी मानने की सोच खत्म होनी चाहिए। नई गाइडलाइंस के मुताबिक, असली खतरा प्रोसेस्ड फूड और जरूरत से ज्यादा चीनी का सेवन है। वहीं अंडे, रेड मीट और फुल-फैट दूध जैसे खाद्य पदार्थों को हाई-क्वालिटी प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना गया है। यह बदलाव भारत जैसे देशों के लिए भी अहम है, जहां दूध, दही, घी, पनीर, अंडा और कुछ जगहों पर रेड मीट पारंपरिक खानपान का हिस्सा रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञ अब भी संतुलन और सीमित मात्रा पर जोर दे रहे हैं।
फैटी लिवर और कोलेस्ट्रॉल के मरीजों के लिए क्या सलाह?
सीनियर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. के अनुसार, कुछ मरीजों के लिए सीमित मात्रा में रेड मीट नुकसानदायक नहीं है, खासकर जब प्रोटीन की जरूरत हो। लेकिन प्रोसेस्ड मीट जैसे सॉसेज, सलामी और बेकन से दूरी बनाना जरूरी है, क्योंकि ये दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं।
क्या भारतीय डाइट में रेड मीट जरूरी?
वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. का कहना है कि भारतीय खानपान में रेड मीट जरूरी नहीं है। अगर कोई इसे खाता भी है, तो हफ्ते में एक बार या 10–15 दिन में सीमित मात्रा में लेना बेहतर है। ज्यादा सेवन से कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ सकता है।
कितनी मात्रा सुरक्षित मानी जाती है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिमी देशों में हफ्ते में लगभग 500 ग्राम रेड मीट को स्वीकार्य माना जाता है, लेकिन भारतीयों के लिए इससे कम मात्रा ही बेहतर है। भारत में पहले से ही कार्बोहाइड्रेट का सेवन ज्यादा होता है, ऐसे में अधिक फैट लेने से डायबिटीज और मोटापे का खतरा बढ़ सकता है।
कैंसर का खतरा कितना?
डॉ. बताते हैं कि रेड मीट को पूरी तरह छोड़ने की जरूरत नहीं है, लेकिन हफ्ते में 1–2 बार से ज्यादा सेवन करने पर कोलोरेक्टल कैंसर और हार्ट डिजीज का जोखिम बढ़ सकता है। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. के अनुसार, रेड मीट में मौजूद कुछ तत्व सूजन और कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
प्रोसेस्ड मीट से क्यों बचें?
सॉसेज, सलामी, बेकन जैसे प्रोसेस्ड मीट में नमक, प्रिजर्वेटिव्स और सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्यादा होती है। ये हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज और मोटापे का खतरा बढ़ा सकते हैं। इसलिए इन्हें रोजमर्रा की डाइट से दूर रखना ही बेहतर माना जाता है।
संतुलन ही है असली समाधान
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर वाल्टर विलेट भी मानते हैं कि ज्यादा रेड मीट और डेयरी फैट से सावधानी जरूरी है। उनका जोर प्लांट-बेस्ड प्रोटीन जैसे दालें, बीन्स, नट्स और सोया पर है, जो दिल और सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद माने जाते हैं।