Edited By Anu Malhotra,Updated: 13 Jan, 2026 12:32 PM

तेलंगाना में कांग्रेस नेतृत्व वाली रेवंत रेड्डी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना दिया है। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल नहीं...
नेशनल डेस्क: तेलंगाना में कांग्रेस नेतृत्व वाली रेवंत रेड्डी सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना दिया है। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगर कोई सरकारी कर्मचारी अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल नहीं करता या उन्हें नजरअंदाज करता है, तो उसकी सैलरी का 10 प्रतिशत हिस्सा सीधे माता-पिता के बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी का कहना है कि यह कदम बुजुर्ग नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। अगर माता-पिता शिकायत दर्ज कराते हैं कि उनका बेटा या बेटी सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद उनकी देखभाल नहीं कर रहा, तो सरकार सीधे कार्रवाई करेगी।
बुजुर्गों के लिए Pranam Day Care सेंटर
इस पहल के तहत, राज्य में सभी वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल के लिए ‘प्रणाम’ नामक डे-केयर सेंटर खोले जाएंगे। ये केंद्र बुजुर्गों को स्वास्थ्य, मनोरंजन और सामाजिक गतिविधियों की सुविधाएं मुहैया कराएंगे।
दिव्यांगों और ट्रांसजेंडरों के लिए योजनाएं
रेवंत रेड्डी सरकार ने राज्य में सामाजिक न्याय और समावेशी विकास को भी आगे बढ़ाया है। दिव्यांग व्यक्तियों के लिए 50 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, और दिव्यांग जोड़ों की शादी पर सरकार 2 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। इसके अलावा, आगामी नगर निकाय चुनावों में हर नगर निगम में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए एक को-ऑप्शन सदस्य का पद आरक्षित किया जाएगा। नए बजट 2026-27 में राज्य की स्वास्थ्य नीति को भी आधुनिक बनाने की योजना है।
कर्मचारियों के लिए चेतावनी और संदेश
सरकारी कर्मचारियों के लिए यह आदेश एक तरह से चेतावनी भी है। बुजुर्गों की अनदेखी करने वाले कर्मचारियों की सैलरी से 10 प्रतिशत काटकर सीधे माता-पिता को दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम केवल अनुशासन और जिम्मेदारी के लिए नहीं, बल्कि समाज में पारिवारिक मूल्यों को मजबूती देने के लिए भी जरूरी है।