लो जी! अब आ गया 50,000 का Heart Attack इंजेक्शन अब फ्री में! 90 मिनट में बचा सकता है जान

Edited By Updated: 23 Nov, 2025 12:39 PM

tenecteplase injection worth 50 000 now free for heart attack patients

उत्तर प्रदेश में हार्ट अटैक से होने वाली मौतों की बढ़ती संख्या और मरीजों को समय पर इलाज न मिल पाने की गंभीर समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने एक युगांतकारी (ऐतिहासिक) निर्णय लिया है। अब प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और प्रमुख...

नेशनल डेस्क। उत्तर प्रदेश में हार्ट अटैक से होने वाली मौतों की बढ़ती संख्या और मरीजों को समय पर इलाज न मिल पाने की गंभीर समस्या को देखते हुए राज्य सरकार ने एक युगांतकारी (ऐतिहासिक) निर्णय लिया है। अब प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और प्रमुख सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) पर हार्ट अटैक के मरीजों को जीवन रक्षक इंजेक्शन टेनेक्टेप्लेस (Tenecteplase) और स्ट्रेप्टोकाइनेज (Streptokinase) बिल्कुल मुफ्त लगाए जाएंगे।

अब कोई जान नहीं जाएगी पैसों की कमी से

यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बाजार में इस लाइफसेविंग इंजेक्शन की कीमत ₹40,000 से ₹50,000 तक होती है जोकि गरीब या मध्यम वर्गीय परिवारों की पहुंच से बाहर होती है। इस निर्णय से यह सुनिश्चित हो गया है कि अब कोई भी मरीज सिर्फ पैसे की कमी के कारण अपना 'गोल्डन आवर' नहीं गंवाएगा और उसकी जान नहीं जाएगी।

हार्ट अटैक में क्यों ज़रूरी है यह इंजेक्शन?

हार्ट अटैक तब होता है जब दिल की धमनियों में खून का थक्का (Blood Clot) जम जाता है जिससे हृदय की मांसपेशियों को रक्त की आपूर्ति रुक जाती है। धमनियों में ब्लॉकेज बनने के शुरुआती 90 मिनट सबसे खतरनाक होते हैं जिन्हें मेडिकल भाषा में 'गोल्डन आवर' कहा जाता है।

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कैसे काम करता है इंजेक्शन 

टेनेक्टेप्लेस और स्ट्रेप्टोकाइनेज दोनों ही क्लॉट बस्टर दवाएं हैं। ये थक्के को तुरंत घोलकर धमनियों में रक्त के प्रवाह को फिर से शुरू कर देती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार गोल्डन आवर के भीतर यदि यह इंजेक्शन लग जाता है तो मृत्यु दर 30 से 40% तक कम हो सकती है। यह निर्णय खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में जहां कार्डियक अस्पताल तुरंत उपलब्ध नहीं होते वहां हजारों जिंदगियां बचाएगा।

 

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हब एंड स्पोक मॉडल से गांव-गांव पहुंचेगा इलाज

इससे पहले ये महंगे इंजेक्शन और उनका इलाज सिर्फ चुनिंदा सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों तक ही सीमित था जिसके कारण मरीजों को अक्सर 30 से 40 किलोमीटर दूर के शहरों तक ले जाना पड़ता था और इस प्रक्रिया में बहुमूल्य गोल्डन टाइम बर्बाद हो जाता था। अब यूपी सरकार इस योजना को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए हब एंड स्पोक मॉडल अपना रही है:

हब (Hub): प्रमुख सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल।

स्पोक (Spoke): जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC)।

यह मॉडल दवाओं की निर्बाध सप्लाई, डॉक्टरों की ट्रेनिंग और पूरी योजना की मॉनिटरिंग को सुनिश्चित करेगा जिससे सेवाएं तेज़ी से गांव-गांव तक पहुंच सकें।

 

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इलाज का प्रोटोकॉल

सरकार ने इसके लिए एक मानक उपचार प्रोटोकॉल (Standard Protocol) भी जारी किया है:

तत्काल ECG: मरीज के अस्पताल पहुंचते ही बिना देर किए तुरंत इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG) किया जाएगा।

इंजेक्शन: हार्ट अटैक की पुष्टि होते ही केवल प्रशिक्षित डॉक्टरों द्वारा टेनेक्टेप्लेस या स्ट्रेप्टोकाइनेज इंजेक्शन लगाया जाएगा।

रेफरल: इंजेक्शन देने के बाद यदि आवश्यक हो तो मरीज को आगे के विशेष उपचार के लिए सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में रेफर किया जाएगा।

यह कदम उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में एक बड़ी क्रांति लाने वाला है।

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