Edited By Pardeep,Updated: 29 Oct, 2026 10:48 PM

भारत के कृषि क्षेत्र में पिछले एक दशक (2015-2025) के दौरान एक व्यापक और ऐतिहासिक बदलाव देखा गया है। खाद्यान्न आत्मनिर्भरता से आगे बढ़कर अब देश पोषण सुरक्षा, किसान समृद्धि, प्राकृतिक संसाधन सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता की दिशा में तेजी से...
नई दिल्ली: भारत के कृषि क्षेत्र में पिछले एक दशक (2015-2025) के दौरान एक व्यापक और ऐतिहासिक बदलाव देखा गया है। खाद्यान्न आत्मनिर्भरता से आगे बढ़कर अब देश पोषण सुरक्षा, किसान समृद्धि, प्राकृतिक संसाधन सुरक्षा और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 'जय जवान, जय किसान' और 'जय विज्ञान' के नारों में 'जय अनुसंधान' जोड़कर अनुसंधान एवं नवाचार को कृषि नीति के केंद्र में रखा गया है।
कृषि विकास दर में बड़ा उछाल, खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
आंकड़ों के अनुसार, 1967-1995 के दौरान कृषि विकास दर औसतन 2.7 प्रतिशत और 1996-2014 के दौरान लगभग 3.0 प्रतिशत रही थी, जो 2015-2025 के दशक में बढ़कर लगभग 4.5 प्रतिशत हो गई है। इसमें फल व सब्जियों का उत्पादन 7.6 मिलियन टन प्रति वर्ष की दर से बढ़ा है। विशेष रूप से पिछले दो वर्षों में खाद्यान्न उत्पादन में 22.1 मिलियन टन प्रति वर्ष की असाधारण वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है।
3,236 नई फसल किस्में जारी, जलवायु अनुकूलता पर फोकस
2014 से 2025 के बीच अनुसंधान एवं विकास के बल पर 3,236 नई फसल किस्में जारी की गईं, जबकि 2003 से 2014 के बीच केवल 1,540 किस्मों को ही मंजूरी मिली थी। हाल ही में विकसित की गई इन किस्मों में जलवायु परिवर्तन का सामना करने की क्षमता (क्लाइमेट रेजिलियंस) और बायोफोर्टिफिकेशन यानी पोषण संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया गया है।
बदलती खान-पान की आदतें: अनाज से पोषण सुरक्षा की ओर
उपभोग के ढर्रे में आए बदलावों के अनुसार, 1972-73 में ग्रामीण भारत में खाद्य खर्च का 57 प्रतिशत हिस्सा अनाजों पर होता था, जो 2022-23 तक घटकर लगभग 11 प्रतिशत रह गया। वहीं दूसरी ओर, दूध, फल, सब्जियां, अंडे, मांस और मछली का हिस्सा 20 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 48 प्रतिशत पहुंच गया है। यही वजह है कि अब दालों, तिलहन, बागवानी, डेयरी और मत्स्य पालन जैसे उच्च मूल्य वाले कृषि क्षेत्रों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
डिजिटल कृषि और सशक्त इंफ्रास्ट्रक्चर का ढांचा
कृषि को आधुनिक और टिकाऊ बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलें लागू की गई हैं:
- पीएम कृषि सिंचाई योजना: कुशल जल उपयोग और सिंचाई विस्तार के लिए।
- सॉइल हेल्थ कार्ड: संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और मिट्टी जांच के लिए।
- पीएम-कुसुम: कृषि को नवीकरणीय ऊर्जा से जोड़ने के लिए।
- e-NAM व FPO: कृषि मंडियों को डिजिटल रूप से जोड़ने और किसानों की मोलभाव शक्ति बढ़ाने के लिए।
- एग्रीस्टैक और AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, रिमोट सेंसिंग और डिजिटल एडवाइजरी के माध्यम से किसानों तक सटीक सलाह पहुंचाने के लिए।
'विकसित कृषि से विकसित भारत 2047'
इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य कम पानी, कम भूमि और कम ऊर्जा में बेहतर गुणवत्ता वाला उत्पादन हासिल करना है। 2047 के 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने में भारतीय किसान केवल विकास के लाभार्थी नहीं, बल्कि एक सशक्त निर्माता की भूमिका निभाएंगे।