Edited By Anu Malhotra,Updated: 25 Feb, 2026 09:45 AM

अक्सर जब हम सुबह सोकर उठते हैं, तो महसूस करते हैं कि तकिया गीला है। यह स्थिति तब पैदा होती है जब नींद के दौरान हमारे मुंह से लार (Drooling) बहने लगती है। हालांकि हम में से अधिकतर लोग इसे एक साधारण बात समझकर नजरअंदाज कर देते हैं या इसे गहरी नींद की...
नेशनल डेस्क: अक्सर जब हम सुबह सोकर उठते हैं, तो महसूस करते हैं कि तकिया गीला है। यह स्थिति तब पैदा होती है जब नींद के दौरान हमारे मुंह से लार (Drooling) बहने लगती है। हालांकि हम में से अधिकतर लोग इसे एक साधारण बात समझकर नजरअंदाज कर देते हैं या इसे गहरी नींद की निशानी मान लेते हैं, लेकिन मेडिकल साइंस की नजर में यह हमेशा सामान्य नहीं होता। विज्ञान की भाषा में इस स्थिति को सियालोरिया (Sialorrhea) कहा जाता है। वैसे तो सोते समय शरीर की मांसपेशियों का शिथिल होना और लार निगलने की प्रक्रिया का धीमा पड़ना एक प्राकृतिक कारण है, लेकिन अगर यह समस्या रोज की आदत बन जाए, तो यह शरीर के भीतर पनप रही किसी बीमारी का अलार्म भी हो सकती है।
क्यों और कैसे बेकाबू हो जाती है लार?
दिन के समय हमारा शरीर लगातार लार बनाता है जिसे हम अनजाने में ही निगलते रहते हैं, लेकिन रात में यह संतुलन बिगड़ सकता है। जब शरीर में लार का उत्पादन जरूरत से ज्यादा होने लगे या फिर गले की मांसपेशियों में किसी खिंचाव या दिक्कत के कारण हम उसे निगल न पाएं, तो वह मुंह से बाहर गिरने लगती है। इसके पीछे कई शारीरिक और मानसिक कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। जो लोग श्वसन नली के संक्रमण, गले की खराश या साइनस जैसी समस्याओं से जूझ रहे होते हैं, उन्हें सांस लेने और निगलने में कठिनाई होती है, जिससे लार जमा होकर बाहर आने लगती है। इसके अलावा, अत्यधिक मानसिक तनाव, नशीले पदार्थों का सेवन, या कुछ विशेष दवाओं के साइड इफेक्ट्स भी लार ग्रंथियों को अतिसक्रिय कर देते हैं। न्यूरोलॉजिकल विकारों से ग्रस्त लोगों में भी यह समस्या प्रमुखता से देखी जाती है।
इन बीमारियों का हो सकता है शुरुआती लक्षण
लार टपकने की यह समस्या केवल नींद की मुद्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपके स्वास्थ्य का आईना भी है। बार-बार लार निकलने का सीधा संबंध साइनस के संक्रमण या ऊपरी श्वसन नली में आई सूजन से हो सकता है। इसके अलावा, जिन लोगों को एसिडिटी या एसिड रिफ्लक्स की पुरानी शिकायत है, उनके शरीर में एसिड को बेअसर करने के लिए लार का उत्पादन बढ़ जाता है। टॉन्सिल्स में सूजन होने पर निगलने का रास्ता संकरा हो जाता है, जिससे लार गले के नीचे जाने के बजाय बाहर का रास्ता चुनती है। पेट में गैस बनना, किसी विशेष खाद्य पदार्थ से एलर्जी, और गलत पोजिशन (खासकर करवट लेकर) में सोना भी इसके बड़े कारण हैं। यदि इसके साथ आपको खर्राटे आने या सांस लेने में भारीपन महसूस हो, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
घरेलू उपायों से पाएं इस समस्या से छुटकारा
अगर आप भी इस असहज स्थिति से बचना चाहते हैं, तो अपनी जीवनशैली में कुछ छोटे लेकिन प्रभावी बदलाव कर सकते हैं। आयुर्वेद और घरेलू नुस्खे इसमें काफी मददगार साबित होते हैं। सबसे पहले अपने खान-पान पर ध्यान दें; रात का भोजन हमेशा हल्का और सुपाच्य होना चाहिए ताकि पेट साफ रहे और गैस की समस्या न हो। शरीर में पानी की कमी न होने दें और दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। औषधीय गुणों से भरपूर तुलसी के पत्ते दिन में दो से तीन बार चबाना लार के असंतुलन को ठीक करने में मदद करता है। इसके अतिरिक्त, दालचीनी का काढ़ा या चाय, जिसमें थोड़ा शहद मिला हो, गले के संक्रमण को दूर कर लार के अधिक बहाव को नियंत्रित करती है। इन उपायों के बावजूद यदि समस्या बरकरार रहती है, तो विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।