Edited By Radhika,Updated: 06 Mar, 2026 11:59 AM

ईरान इजरायल युद्ध के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की चिंताओं को गहरा दिया है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि अगर युद्ध लंबा चलता है तो इससे हमारी डेली यूज़ की कई चीज़ें महंगी हो सकती हैं। बता दें कि भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा, जिसमें...
Inflation Alert: ईरान इजरायल युद्ध के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की चिंताओं को गहरा दिया है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि अगर युद्ध लंबा चलता है तो इससे हमारी डेली यूज़ की कई चीज़ें महंगी हो सकती हैं। बता दें कि भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा, जिसमें खाद्य तेल, दवाओं का कच्चा माल और इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे शामिल हैं, विदेशों से आयात करता है। युद्ध की स्थिति में इन सभी की सप्लाई चेन बाधित होने की आशंका है।
प्लास्टिक और खाद्य तेल की कीमतों में उछाल
युद्ध का असर अभी से दिखना शुरू हो गया है। कच्चे तेल के सह-उत्पाद 'प्लास्टिक दाने' की कीमतों में महज दो दिनों के भीतर 12% की भारी बढ़त दर्ज की गई है। चूंकि प्लास्टिक का उपयोग लगभग हर घरेलू सामान की पैकेजिंग और निर्माण में होता है, इसलिए आने वाले समय में रोजमर्रा की चीजें महंगी होना तय है। इसके साथ ही खाद्य तेलों के बाजार में भी तेजी के संकेत मिलने लगे हैं।
शिपिंग कॉस्ट में हुई150% की भारी वृद्धि
निर्यातकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती समुद्र पार माल भेजना बन गई है। कंटेनर कंपनियों ने 'वार सरचार्ज' के नाम पर किरायों में 150% तक की बढ़ोतरी कर दी है। जो 20 टन का कंटेनर पहले 1100 डॉलर में उपलब्ध था, उसकी कीमत अब 3500 से 3700 डॉलर तक पहुंच गई है। कई कंपनियां बीच समुद्र में फंसे माल को वापस बुलाने का दबाव भी बना रही हैं, जिससे व्यापारियों की लागत और बढ़ जाएगी।

निर्यात और सप्लाई चेन पर संकट
बासमती चावल के निर्यात पर भी इस युद्ध का काला साया मंडरा रहा है। बासमती चावल निर्यात संघ के अनुसार, करीब 1.5 लाख टन चावल अभी रास्ते में है। यदि इसे वापस मंगाया जाता है, तो भारी आर्थिक नुकसान होगा। वहीं, यूरोप और अमेरिका माल भेजने के लिए अब 'केप ऑफ गुड होप' के लंबे रास्ते का सहारा लेना पड़ेगा। इस वैकल्पिक रूट से माल पहुंचने में 15 दिन अधिक लगेंगे और खर्च में 30-40% का इजाफा होगा।
दवा और इलेक्ट्रॉनिक्स पर भी हो सकता है असर
भारत दवा निर्माण के लिए कच्चे माल का बड़े पैमाने पर आयात करता है। युद्ध लंबा चलने पर दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं। यही स्थिति टीवी, फ्रिज और मोबाइल फोन जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी है, जिनकी निर्माण लागत आयातित पुर्जे महंगे होने के कारण बढ़ जाएगी।