Edited By Radhika,Updated: 16 Jun, 2026 02:32 PM

कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार और RSS के बीच एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने RSS प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर आधिकारिक तौर पर पदाधिकारियों की सूची मांगी है। इसी के साथ उन्होंने यह भी पूछा कि वे इतने बड़े...
नेशनल डेस्क: कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार और RSS के बीच एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने RSS प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर आधिकारिक तौर पर पदाधिकारियों की सूची मांगी है। इसी के साथ उन्होंने यह भी पूछा कि वे इतने बड़े संगठन के बिना रजिस्ट्रेशन के कैसे काम कर रहे हैं। इसी के साथ खरगे ने अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की 2025-26 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कर्नाटक में हर दिन 4,127 शाखाएं लगती हैं। इसके अलावा 1,389 साप्ताहिक मिलन और 60 मासिक मंडलियां भी चलती हैं। प्रियांक ने अपनी बात को जारी रखते हुए कई सवाल उठाए हैं, जो इस प्रकार हैं-
- इतने बड़े स्तर पर होने वाली गतिविधियों के लिए पैसा कहाँ से आता है, इसका स्रोत क्या है और खर्च का ब्यौरा क्या है?
- संगठन के पास मौजूद संपत्तियों का विवरण क्या है और क्या नियमों के तहत टैक्स का भुगतान किया जा रहा है?
- बिना पंजीकरण के बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों और रूट मार्च के आयोजन के लिए अनुमतियाँ किस आधार पर ली जाती हैं?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस और RSS के बीच का यह विवाद नया नहीं है। इतिहास में भी साल 1948 में 1975 (आपातकाल के दौरान) और 1992 (बाबरी ढांचे के विध्वंस के बाद) में RSS को बैन किया गया था, जिसे बाद में हटा दिया गया। संघ पर प्रतिबंध लग चुके हैं, जो बाद में हटा लिए गए। विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस संघ को दक्षिणपंथी और ध्रुवीकरण करने वाला संगठन मानकर घेरती है, जिससे उसे अपने कोर वोट बैंक (विशेषकर अल्पसंख्यकों) को एकजुट रखने में मदद मिलती है।