Edited By Anu Malhotra,Updated: 19 Mar, 2026 08:56 AM

नेशनल हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने टोल टैक्स की वसूली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए कमर कस ली है। 17 मार्च 2026 से 'नेशनल हाईवे फीस (डिटरमिनेशन ऑफ रेट्स एंड...
नेशनल डेस्क: नेशनल हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने टोल टैक्स की वसूली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए कमर कस ली है। 17 मार्च 2026 से 'नेशनल हाईवे फीस (डिटरमिनेशन ऑफ रेट्स एंड कलेक्शन) सेकेंड अमेंडमेंट रूल्स, 2026' को पूरे देश में प्रभावी कर दिया गया है। इस नए कानून का सबसे अहम हिस्सा यह है कि अब टोल नाका पार करते समय अगर आपके खाते से पैसे नहीं कटते हैं, तो इसे 'अनपेड यूजर फी' की श्रेणी में रखा जाएगा। यानी, अगर सिस्टम ने आपकी गाड़ी को रिकॉर्ड कर लिया लेकिन भुगतान सफल नहीं हुआ, तो आप सरकार की रडार पर आ जाएंगे।
टोल बकाया रहेगा तो आएगा 'E-Notice'
सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और हाई-टेक बना दिया है। अब टोल प्लाजा पर रुककर बहस करने का दौर खत्म हो रहा है, क्योंकि बकाया टोल की वसूली के लिए सीधे 'E-Notice' का सहारा लिया जाएगा। जैसे ही किसी वाहन का टोल बकाया रहेगा, उसके मालिक के पास SMS, ईमेल या मोबाइल ऐप के माध्यम से एक नोटिस पहुंच जाएगा। इस ई-नोटिस में गाड़ी की पूरी जानकारी के साथ-साथ वह तारीख, समय और लोकेशन भी दर्ज होगी जहां टोल नहीं चुकाया गया था। यह सारी जानकारी एक आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल पर भी उपलब्ध रहेगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
72 घंटों के भीतर टोल नहीं दे पाते दोगुना भुगतान
हालांकि, सरकार ने उन लोगों के लिए राहत का रास्ता भी खुला रखा है जो अनजाने में या तकनीकी खराबी के कारण टोल नहीं दे पाते। अगर आपको E-Notice मिलता है और आप अगले 72 घंटों के भीतर उस बकाया राशि का भुगतान कर देते हैं, तो आपसे कोई अतिरिक्त जुर्माना नहीं लिया जाएगा। आपको केवल वही मूल राशि देनी होगी जो उस टोल पर निर्धारित थी। लेकिन अगर आपने इस 'गोल्डन पीरियड' यानी 72 घंटों को नजरअंदाज किया, तो आपको भारी चपत लगनी तय है। तय समय सीमा बीतने के बाद, आपको मूल टोल राशि का सीधा दोगुना भुगतान करना होगा।
इतना ही नहीं, सिस्टम को न्यायपूर्ण बनाने के लिए सरकार ने अपील करने का विकल्प भी दिया है। अगर किसी वाहन मालिक को लगता है कि उसे गलत तरीके से नोटिस भेजा गया है या उसकी गाड़ी उस टोल से गुजरी ही नहीं, तो वह 72 घंटों के अंदर ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। प्रशासन के लिए भी नियम सख्त हैं; उन्हें ऐसी किसी भी शिकायत का समाधान 5 दिनों के भीतर करना होगा। यदि अधिकारी इस समय सीमा में जवाब नहीं दे पाते हैं, तो वह जुर्माना और नोटिस अपने आप निरस्त मान लिया जाएगा।
ऐसे वाहन हो जाएंगे ब्लैकलिस्ट
सबसे गंभीर कार्रवाई उन लोगों के खिलाफ होगी जो 15 दिनों तक न तो टोल चुकाते हैं और न ही कोई शिकायत दर्ज करते हैं। ऐसे वाहनों को ब्लैकलिस्ट की तर्ज पर रिकॉर्ड में डाल दिया जाएगा। इसका सीधा असर आपकी गाड़ी के भविष्य पर पड़ेगा, क्योंकि जब तक बकाया जमा नहीं होगा, तब तक वाहन का रजिस्ट्रेशन रिन्यू कराना, उसे किसी और के नाम ट्रांसफर करना या अन्य सरकारी सेवाओं का लाभ लेना असंभव हो जाएगा। सरकार का मानना है कि इस 'बैरियर-फ्री' व्यवस्था से न केवल ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी, बल्कि हाईवे प्रोजेक्ट्स में निवेश करने वाली कंपनियों का भरोसा भी मजबूत होगा।