'उदयपुर फाइल्स' फिल्म पर बैन से नाराज कन्हैयालाल का परिवार, अब पत्नी ने PM को लिखा पत्र

Edited By Updated: 13 Jul, 2025 06:02 AM

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राजस्थान के बहुचर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड पर आधारित फिल्म 'उदयपुर फाइल्स' की रिलीज़ पर दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई अंतरिम रोक ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस फैसले के खिलाफ अब पीड़ित परिवार खुलकर सामने आ गया है। कन्हैयालाल की पत्नी जशोदा तेली...

नेशनल डेस्क : राजस्थान के बहुचर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड पर आधारित फिल्म 'उदयपुर फाइल्स' की रिलीज़ पर दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई अंतरिम रोक ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस फैसले के खिलाफ अब पीड़ित परिवार खुलकर सामने आ गया है। कन्हैयालाल की पत्नी जशोदा तेली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक भावुक पत्र लिखते हुए फिल्म को रिलीज़ करने की अनुमति देने और अपने परिवार को न्याय दिलाने की गुहार लगाई है।

पीएम को लिखा भावुक पत्र, कपिल सिब्बल पर लगाए आरोप
अपने पत्र में जशोदा ने वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और कुछ मुस्लिम संगठनों पर फिल्म को रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा कि उन्होंने और उनके बच्चों ने 'उदयपुर फाइल्स' देखी है और यह फिल्म उनके पति की निर्मम हत्या की सच्चाई को दर्शाती है। "तीन साल पहले मेरे पति को बेरहमी से मारा गया, और अब जब कोई इस सत्य को सामने लाने की कोशिश कर रहा है, तो उसे भी रोकने की कोशिश हो रही है।" जशोदा ने पीएम मोदी से मुलाकात का समय भी मांगा है, ताकि वह अपने बच्चों के साथ मिलकर अपनी बात सीधे रख सकें। उन्होंने लिखा, “मेरे बच्चों ने कहा कि यह मामला अब मोदी सरकार के पास है। कृपया हमारी आवाज़ सुनिए।”

 

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कन्हैयालाल के बेटे यश का सवाल – 'ये कैसा न्याय है?'
कन्हैयालाल के बेटे यश तेली ने भी अपनी पीड़ा जाहिर की। उन्होंने कहा, "तीन साल बीत गए, लेकिन मेरे पिता के हत्यारों को अब तक सज़ा नहीं मिली। वीडियो साक्ष्य होने के बावजूद केस लटका हुआ है। और जब कोई फिल्म के जरिए सच्चाई सामने लाने की कोशिश कर रहा है, तो उसे रोक दिया जाता है। ये कैसा न्याय है?"

दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश
'उदयपुर फाइल्स' 11 जुलाई 2025 को रिलीज़ होने वाली थी, लेकिन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी सहित अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 10 जुलाई को इस पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस अनीश दयाल शामिल थे, ने केंद्र सरकार को सिनेमैटोग्राफ अधिनियम की धारा 6 के तहत पुनरीक्षण शक्तियों का उपयोग कर एक सप्ताह में निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

जब तक केंद्र सरकार इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं लेती, फिल्म की रिलीज़ पर रोक जारी रहेगी। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह फिल्म सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ सकती है और मुस्लिम समुदाय को बदनाम करती है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार किया
फिल्म की रिलीज़ को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई थी, जिसमें मांग की गई थी कि इसे कांवड़ यात्रा के समाप्त होने तक रोका जाए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही इस मामले में अंतरिम आदेश जारी कर चुका है।

फिल्म पर विवाद क्यों?
'उदयपुर फाइल्स' का ट्रेलर रिलीज़ होते ही यह फिल्म विवादों में घिर गई थी। कुछ संगठनों ने इसे धार्मिक नफरत फैलाने वाला बताया है, जबकि कन्हैयालाल के परिजन और समर्थक इसे उस जघन्य हत्याकांड की सच्चाई बताने वाला माध्यम मानते हैं। सोशल मीडिया पर भी इस विषय पर तीखी बहस चल रही है — एक ओर लोग फिल्म की रिलीज़ का समर्थन कर रहे हैं, तो दूसरी ओर कुछ इसे धार्मिक सौहार्द के लिए खतरा मानते हैं।

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