अनोखा गांव, जहां पैदा होते हैं सिर्फ जुड़वा बच्चे

Edited By Updated: 27 May, 2018 12:10 PM

unique village where births are just twins

किसी शायर ने क्या खूब कहा है, ‘‘तेरी सूरत से नहीं मिलती किसी की सूरत, हम जहां में तेरी तस्वीर लिए फिरते हैं...’’ लेकिन केरल में एक गांव ऐसा है जो इस बात को झूठ साबित कर रहा है...

नेशनल डेस्क: किसी शायर ने क्या खूब कहा है, ‘‘तेरी सूरत से नहीं मिलती किसी की सूरत, हम जहां में तेरी तस्वीर लिए फिरते हैं...’’ लेकिन केरल में एक गांव ऐसा है जो इस बात को झूठ साबित कर रहा है क्योंकि यहां चार सौ से ज्यादा लोग ऐसे हैं, जिनके जुड़वां चेहरे इस गांव में ही मौजूद हैं। केरल के कोच्चि शहर से करीब 150 किलोमीटर के फासले पर स्थित कोडिन्ही गांव के कारण पूरी दुनिया के वैज्ञानिक सकते में हैं कि ऐसा क्या है इस गांव की आबो हवा में कि यहां पैदा होने वाले जुड़वां बच्चों का औसत सारी दुनिया के औसत से सात गुना ज्यादा है। 
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मल्लापुरम जिले में तिरूरंगाडी कस्बे से सटे इस गांव में पैदा होने वाले जुड़वां बच्चों की तादाद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तकरीबन दो हजार लोगों की आबादी वाले इस गांव के हर घर में जुड़वां बच्चे हैं। यहां नवजात जुड़वां बच्चों से लेकर बुजुर्ग जुड़वां तक मौजूद हैं। वैज्ञानिक इस राज समझने में लगे हैं कि इस गांव में दुनिया में जुड़वां बच्चों के औसत से आखिर सात गुना ज्यादा जुड़वां बच्चे आखिर कैसे पैदा होते हैं। आम तौर पर दुनिया भर में 1,000 में मात्र छह ही जुड़वां बच्चे पैदा होते हैं, जबकि यहां हर 1,000 बच्चों में 42 जुड़वां पैदा होते हैं। 
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गांव में प्रवेश करते ही नीले रंग के एक साइनबोर्ड पर लिखा है कि भगवान के अपने जुड़वां गांव, कोडिन्ही में आपका स्वागत है। दुनियाभर में इस शहर को जुड़वां गांव के नाम से ही जाना जाता है।  इस गांव की 85 फीसदी आबादी मुस्लिम है, लेकिन ऐसा नहीं कि हिन्दू परिवारों में जुड़वां पैदा नहीं होते। स्थानीय लोग बताते हैं कि जुड़वां बच्चों का सिलसिला यहां करीब 60 से 70 साल पहले शुरू हुआ। गांव के सरपंच का कहना है कि किसी दूसरे गांव की लड़की यहां ब्याह कर आती है तो उनके भी जुड़वां बच्चे पैदा होते हैं। गांव में रहने वाली पथूटी और कुन्ही पथूटी सबसे ज्यादा उम्र की जुड़वां बहनें हैं। इनकी उम्र करीब 70 साल है और वे इसे किसी करिश्मे से कम नहीं मानतीं। 
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इस गुत्थी को समझने के लिए कुछ समय पहले भारत, जर्मनी और ब्रिटेन का एक संयुक्त अध्ययन दल यहां आया था और उन्होंने यहां के लोगों के डीएनए का अध्ययन करने के लिए कुछ नमूने एकत्र किए। इसी तरह बहुत से दल यहां आते हैं और यहां के लोगों के चेहरे मोहरे, यहां की आबो हवा, खान पान और अन्य तमाम तरह के अध्ययन करते हैं, लेकिन जुड़वां बच्चे पैदा होने की कोई वजह आज तक मालूम नहीं हो पाई। गांव में ही रहने वाली 17 बरस की सुमायत और अफसायत देखने में एकदम एक जैसी हैं। मां दोनो को कभी एक जैसे कपड़े नहीं पहनने देती और हमेशा उन्हें कपड़ों से पहचानने की कोशिश करती है। खेल के मैदान पर भी अकसर जुड़वां बच्चों के कारण झगड़ा हो जाता होगा। 
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केरल के कोडिन्ही जैसे दुनिया में दो और गांव हैं, नाइजीरिया का इग्बो ओरा और ब्राजील का कैंडिडो गोडोई। यहां भी वैज्ञानिकों ने जुड़वां बच्चों की प्रक्रिया को समझने की कोशिश की। नाइजीरिया में पाया गया कि वहां मिलने वाली एक सब्जी के छिलके में रसायन की अधिक मात्रा के कारण ऐसा हुआ। वहीं ब्राजील वाले मामले में रिसर्चरों को कहना है कि उस समुदाय में सब आपस में ही शादी करते हैं और वहां शायद इसलिए ऐसा होता है। लेकिन कोडिन्ही का मामला अब भी रिसर्चरों के लिए चुनौती बना हुआ है। 

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