LPG सिलेंडर को लेकर बड़ा फैसला संभव! अब 14.2 किलो के सिलेंडर में मिलेगी सिर्फ 10 किलो गैस?

Edited By Updated: 23 Mar, 2026 09:17 AM

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ईरान में छिड़ी जंग की लपटें अब भारतीय रसोइयों तक पहुंचने लगी हैं। खाड़ी देशों से होने वाली गैस सप्लाई में भारी गिरावट के बाद, देश की तेल विपणन कंपनियां एक बेहद चौंकाने वाले विकल्प पर विचार कर रही हैं।  योजना यह है कि अब आपके घर आने वाले पारंपरिक...

बिज़नेस डेस्क: ईरान में छिड़ी जंग की लपटें अब भारतीय रसोइयों तक पहुंचने लगी हैं। खाड़ी देशों से होने वाली गैस सप्लाई में भारी गिरावट के बाद, देश की तेल विपणन कंपनियां एक बेहद चौंकाने वाले विकल्प पर विचार कर रही हैं। Economic Times की खबर के मुताबिक, योजना यह है कि अब आपके घर आने वाले पारंपरिक 14.2 किलो के भारी-भरकम सिलेंडर में पूरी गैस भरने के बजाय, केवल 10 किलो गैस ही भरी जाए। इस 'कटौती' के पीछे का तर्क यह है कि कम गैस बांटकर मौजूदा सीमित स्टॉक को ज्यादा से ज्यादा परिवारों तक पहुंचाया जा सके, ताकि कोई भी घर पूरी तरह खाली हाथ न रहे।

सप्लाई चेन की टूटी कमर और हॉर्मुज का अड़ंगा
भारत की रसोई गैस का एक बड़ा हिस्सा विदेशी आयात पर निर्भर है, जिसमें खाड़ी देशों की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत के करीब है। युद्ध के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जहाजों का निकलना दूभर हो गया है। हालात इतने नाजुक हैं कि पिछले हफ्ते भारत आने वाले केवल दो जहाज ही इस रास्ते को पार कर सके, जो पूरे देश की महज एक दिन की खपत के बराबर थे। फिलहाल भारत के छह बड़े एलपीजी टैंकर उसी इलाके में फंसे हुए हैं, जिससे आने वाले दिनों में किल्लत और बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?
अगर यह फैसला लागू होता है, तो कंपनियों को अपने बॉटलिंग प्लांट में तकनीकी बदलाव करने होंगे। सिलेंडर पर नई मात्रा और बदली हुई कीमतों के स्टिकर लगाए जाएंगे। अधिकारियों का मानना है कि 10 किलो गैस भी एक औसत परिवार का काम करीब एक महीने तक चला सकती है। हालांकि, इस फैसले से राजनीतिक विरोध और जनता में भ्रम फैलने का डर भी बना हुआ है, लेकिन सप्लाई की वर्तमान स्थिति को देखते हुए इसे एक 'कड़वी दवा' की तरह देखा जा रहा है।

संरक्षण की अपील और भविष्य की चुनौती
पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से गैस बचाने की अपील जारी की गई है। हालांकि फिलहाल घरेलू सप्लाई को नियमित रखने की कोशिश की जा रही है, लेकिन मार्च के शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि खपत में पहले ही 17 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। अमेरिकी रुख और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बीच अगर सप्लाई रूट पूरी तरह बंद होता है, तो भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं। फिलहाल सबकी नजरें सरकार की अगली आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं।
 

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