Edited By Mansa Devi,Updated: 13 Feb, 2026 04:53 PM

आज की बदलती जीवनशैली के बीच महिलाओं में विटामिन डी की कमी एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रूप में सामने आ रही है। लंबे समय तक घर या ऑफिस के अंदर रहना, धूप में कम निकलना और सनस्क्रीन का अधिक इस्तेमाल शरीर में प्राकृतिक रूप से बनने वाले विटामिन...
नेशनल डेस्क: आज की बदलती जीवनशैली के बीच महिलाओं में विटामिन डी की कमी एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या के रूप में सामने आ रही है। लंबे समय तक घर या ऑफिस के अंदर रहना, धूप में कम निकलना और सनस्क्रीन का अधिक इस्तेमाल शरीर में प्राकृतिक रूप से बनने वाले विटामिन डी के स्तर को प्रभावित कर रहा है।
इसके अलावा असंतुलित खानपान, दूध और डेयरी उत्पादों का कम सेवन, मोटापा, हार्मोनल बदलाव और शहरी क्षेत्रों में बढ़ता प्रदूषण भी इस समस्या को तेजी से बढ़ा रहे हैं। व्यस्त दिनचर्या के कारण कई महिलाएं अपनी सेहत को प्राथमिकता नहीं दे पातीं, जिससे यह कमी धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लेती है। विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली में मोबाइल और लैपटॉप पर लंबे समय तक काम करना, शारीरिक गतिविधियों की कमी और बाहर कम समय बिताना भी शरीर की प्राकृतिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करता है।
उम्र बढ़ने के साथ शरीर की विटामिन डी को अवशोषित करने की क्षमता घटने लगती है, वहीं कुछ दवाइयों का लंबे समय तक सेवन भी इसके स्तर को कम कर सकता है। यही वजह है कि आज युवा महिलाओं से लेकर मध्यम आयु वर्ग तक में इसकी कमी तेजी से देखी जा रही है। दिल्ली के आरएमएल अस्पताल के महिला रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सलोनी चड्ढा के अनुसार, विटामिन डी की कमी होने पर महिलाओं को लगातार थकान, कमजोरी और शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होती है। हड्डियों और जोड़ों में दर्द, खासकर कमर और पैरों में दर्द इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
कई मामलों में मांसपेशियों में खिंचाव, बालों का झड़ना, बार-बार संक्रमण होना और इम्यूनिटी कमजोर पड़ना भी इसी समस्या से जुड़ा पाया गया है। कुछ महिलाओं में नींद की परेशानी, मूड स्विंग और बिना कारण उदासी भी इसके संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर जांच कराना जरूरी माना जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक जो महिलाएं धूप में कम निकलती हैं, गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं, मोटापे से ग्रस्त महिलाएं और 40 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में इसका खतरा ज्यादा रहता है। जिनका खानपान संतुलित नहीं है या जिन्हें हार्मोनल समस्याएं हैं, उन्हें विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित आदतों में छोटे बदलाव कर इस समस्या से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है। रोजाना 15 से 20 मिनट सुबह की धूप लेना, आहार में दूध, दही, पनीर, अंडा और फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ शामिल करना तथा नियमित व्यायाम करना हड्डियों और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखने में मदद करता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लेना और समय-समय पर जांच कराना जरूरी है, ताकि शरीर में विटामिन डी का स्तर संतुलित बना रहे और भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सके।