Gold Price Hike: आखिर क्यों लगातार बढ़ रही है सोने की कीमतें, सामने आई बड़ी वजह

Edited By Updated: 15 Oct, 2025 03:59 PM

why are gold prices continuously increasing the big reason has come to light

सोने की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और अब रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई हैं। अमेरिका-चीन ट्रेड तनाव, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद और केंद्रीय बैंकों की भारी खरीद इसके मुख्य कारण हैं। भारत में भी 10 ग्राम सोना अब 1,30,000 रुपये के पार...

नेशनल डेस्क : अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें लगातार नए रिकॉर्ड तोड़ रही हैं। अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते ट्रेड तनाव और साल के आखिर तक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं के चलते सोना 4,185 डॉलर प्रति औंस के नए पीक पर पहुंच गया है। वहीं चांदी भी 53.54 डॉलर प्रति औंस से ऊपर अपने ऑल टाइम हाई स्तर पर ट्रेड कर रही है।

सोने की मांग और ऐतिहासिक तेजी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल के पहले 10 महीनों में सोने ने 50 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दिया है। अकेले इस साल सोना तीन दर्जन से अधिक बार अपने ऑल टाइम हाई तक पहुंचा। आश्चर्य की बात यह है कि सोने की मांग पिछले 15 सालों से स्थिर रही है और सप्लाई में कोई बड़ी कमी नहीं आई। इसके बावजूद, सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की खरीदारी लगातार बढ़ रही है।

यह भी पढ़ें - नहीं रहे महाभारत में 'कर्ण' का रोल निभाने वाले पंकज धीर, इस गंभीर बिमारी से हुई मौ/त

बीते तीन सालों में दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने सोने की भारी खरीदारी की है। इसके अलावा, अमेरिकी टैरिफ पॉलिसी और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव ने भी सोने की कीमतों में उछाल लाया है। इन सभी कारणों से दुनिया में सोने की डिमांड में 2010 से अब तक लगभग 15 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। भारत और चीन जैसे देश सोने के प्रमुख खरीदार रहे हैं।

भारत में आम आदमी की पहुंच से बाहर होता सोना

भारत में सोने की कीमतों में दिन-दूनी रात-चौगुनी तेजी देखी जा रही है। 2010 के दशक में 10 ग्राम सोने की कीमत 40,000-50,000 रुपये थी, जबकि अब 10 ग्राम सोना 1,30,000 रुपये के पार पहुंच गया है। सिर्फ इस साल ही भारत में सोने की कीमत में 51 प्रतिशत तक की तेजी आई है।

केंद्रीय बैंकों की खरीदारी जारी

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले तीन सालों में केंद्रीय बैंकों ने हर साल 1,000 टन से अधिक सोना खरीदा है। मई 2025 तक उनके पास कुल 36,344 टन सोना था। चूंकि सोने के कुल भंडार का एक चौथाई हिस्सा केंद्रीय बैंकों द्वारा खरीदा जा रहा है, इसलिए गहनों और निवेश के लिए उपलब्ध सप्लाई पर दबाव बना हुआ है।

यह भी पढ़ें - कितने करोड़ की दौलत पीछे छोड़ गए महाभारत के 'कर्ण' पंकज धीर? जानकर उड़ जाएंगे होश

डॉलर की गिरावट और कीमतों पर असर

इस साल अमेरिकी डॉलर में 11 प्रतिशत तक गिरावट आई है, जो 1973 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है। आमतौर पर डॉलर और सोने के भाव में विपरीत संबंध होता है। डॉलर कमजोर होने से सोने की कीमतें और बढ़ गई हैं। इन सभी कारणों को देखते हुए, सोने की कीमत में जल्द ही कमी आने की संभावना कम है।

 

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!