Edited By Anu Malhotra,Updated: 23 Feb, 2026 09:18 AM

सरकारी महकमों के गलियारों में इन दिनों बस एक ही चर्चा है- 8th Pay Commission। चपरासी से लेकर बड़े अफसरों तक, हर कोई अपनी भविष्य की पे-स्लिप का गणित लगाने में जुटा है। लेकिन सबसे ज्यादा दिलचस्पी पुलिस महकमे के रसूखदार पद 'DSP' (डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ...
नेशनल डेस्क: सरकारी महकमों के गलियारों में इन दिनों बस एक ही चर्चा है- 8th Pay Commission। चपरासी से लेकर बड़े अफसरों तक, हर कोई अपनी भविष्य की पे-स्लिप का गणित लगाने में जुटा है। लेकिन सबसे ज्यादा दिलचस्पी पुलिस महकमे के रसूखदार पद 'DSP' (डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस) की तनख्वाह को लेकर देखी जा रही है। माना जा रहा है कि नया वेतन आयोग लागू होते ही पुलिस कप्तानों की जेब पहले से कहीं ज्यादा भारी होने वाली है।
वेतन का नया गणित और फिटमेंट फैक्टर का खेल
आमतौर पर सरकार हर दशक में कर्मचारियों की सुख-सुविधाओं और महंगाई को देखते हुए वेतन आयोग का गठन करती है। अब तक सात बार यह प्रक्रिया हो चुकी है और अब आठवें की बारी है। फिलहाल एक डीएसपी को पे मैट्रिक्स के लेवल 9 के तहत वेतन मिलता है, जिसकी शुरुआती बेसिक पे 53,100 रुपये है। लेकिन असली जादू छिपा है 'फिटमेंट फैक्टर' में।
अगर सरकार इस बार फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 2.86 के करीब ले जाती है, तो DSP रैंक के अधिकारियों की बुनियादी सैलरी में ही ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, जो बेसिक सैलरी अभी 53 हजार के आसपास है, वह छलांग लगाकर सीधे 1.50 लाख रुपये प्रति माह के पार पहुंच सकती है।
सिर्फ बेसिक नहीं, भत्तों का भी मिलेगा सहारा
हैरान करने वाली बात यह है कि डेढ़ लाख रुपये तो सिर्फ एक शुरुआत यानी 'बेसिक सैलरी' होगी। एक पुलिस अफसर को इसके ऊपर महंगाई भत्ता (DA), घर का किराया (HRA) और यात्रा भत्ता (TA) जैसी कई सुविधाएं मिलती हैं। जब ये सारे भत्ते नई बेसिक सैलरी में जुड़ेंगे, तो कुल वेतन का आंकड़ा काफी आकर्षक हो जाएगा। यही वजह है कि राज्य और संघ लोक सेवा आयोग की तैयारी करने वाले युवाओं के बीच इस पद को लेकर क्रेज और ज्यादा बढ़ गया है।
पावर के साथ अब शानदार पैकेज
डीएसपी का पद हमेशा से अपने रौब और जिम्मेदारी के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन 8वें वेतन आयोग के बाद यह आर्थिक रूप से भी सबसे दमदार नौकरियों में शुमार हो जाएगा। हालांकि अभी सरकार की तरफ से आधिकारिक मुहर लगना बाकी है, फिर भी इन संभावनाओं ने पुलिस महकमे में उत्साह की लहर दौड़ दी है। अब देखना यह होगा कि सरकार फिटमेंट फैक्टर की चाबी किस आंकड़े पर घुमाती है।