Premanand Maharaj: पाप करने से पहले भगवान हमें खुद क्यों नहीं रोकते? प्रेमानंद महाराज ने बताया इसके पीछे की बड़ी वजह

Edited By Updated: 11 Jan, 2026 02:04 PM

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आज के दौर में जब लोग दुखों और समाज की बुराइयों से घिरे होते हैं। तो अक्सर मन में एक सवाल उठता है कि अगर भगवान सब देख रहे हैं और हम उनके बच्चे हैं, तो वे हमें गलत रास्ता क्यों नहीं रोकते।

नेशनल डेस्क: आज के दौर में जब लोग दुखों और समाज की बुराइयों से घिरे होते हैं। तो अक्सर मन में एक सवाल उठता है कि अगर भगवान सब देख रहे हैं और हम उनके बच्चे हैं, तो वे हमें गलत रास्ता क्यों नहीं रोकते। इसी सवाल को लेकर हाल ही में एक भक्त ने अध्यात्मिक गुरू प्रेमानंद महाराज से जिज्ञासा व्यक्त की। महाराज का जवाब न केवल तार्किक था बल्कि जीवन की दिशा बदल देने वाला भी।

भक्त की जिज्ञासा
भक्त ने महाराज से पूछा कि यदि हम परमात्मा के अंश हैं और भगवान हमारे पिता हैं, तो उन्होंने हमें गलत काम करने की शक्ति क्यों दी। जब उन्हें पता है कि हम गलत राह पर जा रहे हैं, तो वे हाथ पकड़कर हमें रोक क्यों नहीं लेते। प्रेमानंद महाराज ने समझाया कि इसे एक साधारण उदाहरण से समझा जा सकता है। उन्होंने कहा, "मान लीजिए किसी ने आपको ₹100 दिए और बाजार भेज दिया। अब यह आप पर निर्भर करता है कि आप उस पैसे से फल और मिठाई खरीदकर पेट भरेंगे, या जुआ और शराब जैसी बुरी आदतों में उड़ा देंगे। देने वाले ने केवल साधन दिया है, उसका उपयोग किस प्रकार होगा यह आपका चुनाव है।"

भक्त के सवाल पर प्रेमानंद महाराज का जवाब
महाराज ने आगे बताया कि भगवान ने मनुष्य को हाथ, पैर, वाणी और सबसे बढ़कर विवेक (सोचने-समझने की शक्ति) दी है। यही ईश्वरीय पूंजी है, जिसके जरिए मनुष्य सही और गलत का चुनाव करता है। उदाहरण के तौर पर, वाणी का चुनाव आप कर सकते हैं कि आप किसी को गाली दें या 'राम-राम', 'राधा-राधा' का जाप करें। आंखें और इंद्रियां भी इसी तरह हैं आप उनसे अश्लीलता देख सकते हैं या प्रभु के दर्शन कर सकते हैं। हाथों से किसी की मदद करना या अहित करना भी आपके विवेक पर निर्भर करता है।


मनुष्य जन्म का असली उद्देश्य
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, मनुष्य जन्म का असली उद्देश्य अपनी पुरानी गलतियों और बुरी आदतों को सुधारना है। भगवान ने हमें कर्म की स्वतंत्रता दी है। अगर वे हमें रोबोट की तरह नियंत्रित करते, तो पाप और पुण्य का कोई महत्व नहीं रह जाता। भगवान ने हमें बुद्धि और अंतरात्मा दी है, जो हर गलत कदम से पहले हमें चेतावनी देती है।

इसे महाराज कहते हैं कि यही भगवान का हमें रोकने का तरीका है। यदि हम उस आवाज़ को अनसुना कर देते हैं, तो यह हमारी इच्छाशक्ति की कमी होती है। इसलिए, मनुष्य का कर्तव्य है कि वह उस ईश्वरीय शक्ति का उपयोग केवल सत्कर्मों में करे। भगवान रास्ता दिखाते हैं, लेकिन उस रास्ते पर चलना या न चलना पूरी तरह हमारे हाथ में है।

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