फ्लाइट में एयरप्लेन मोड क्यों होता है ज़रूरी? जानिए वो वजह जो आधी आबादी नहीं जानती

Edited By Updated: 14 Jun, 2025 04:50 PM

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जब आप किसी घरेलू या अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट में सवार होते हैं, तो टेक-ऑफ से पहले फ्लाइट अटेंडेंट या पायलट द्वारा बार-बार कहा जाता है – "कृपया अपने मोबाइल फोन को एयरप्लेन मोड पर कर लें।" यह सुनकर अधिकतर लोग फोन की सेटिंग में जाकर एयरप्लेन आइकन दबा देते...

नेशनल डेस्क: जब आप किसी घरेलू या अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट में सवार होते हैं, तो टेक-ऑफ से पहले फ्लाइट अटेंडेंट या पायलट द्वारा बार-बार कहा जाता है – "कृपया अपने मोबाइल फोन को एयरप्लेन मोड पर कर लें।" यह सुनकर अधिकतर लोग फोन की सेटिंग में जाकर एयरप्लेन आइकन दबा देते हैं, लेकिन बहुत से लोगों को इस बात की जानकारी नहीं होती कि आखिर ऐसा करने के पीछे असली कारण क्या है।

एयरप्लेन मोड होता क्या है?
एयरप्लेन मोड एक ऐसा फ़ंक्शन होता है जिसे ऑन करते ही आपके मोबाइल फोन की सभी वायरलेस सेवाएं — जैसे मोबाइल नेटवर्क, Wi-Fi, Bluetooth और GPS सिग्नल अस्थायी रूप से बंद हो जाते हैं। इसका मतलब है कि फोन अब न तो किसी टावर से सिग्नल ले सकता है और न ही भेज सकता है।

अगर एयरप्लेन मोड न लगाया जाए तो?
रेडियो इंटरफेरेंस का खतरा: फ्लाइट और ग्राउंड कंट्रोल (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) के बीच बेहद संवेदनशील रेडियो फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल होता है। अगर सैकड़ों लोग अपने फोन का नेटवर्क चालू रखते हैं, तो इससे रेडियो सिग्नलों में बाधा पड़ सकती है।
नेविगेशन सिस्टम में रुकावट: पायलट के डिस्प्ले या संचार प्रणाली पर गलत जानकारी जा सकती है जिससे फ्लाइट की दिशा, गति और ऊंचाई की सटीकता प्रभावित हो सकती है।
फोन की बैटरी तेजी से खत्म होती है: जब फ्लाइट 30,000 फीट की ऊंचाई पर होती है, वहां मोबाइल नेटवर्क नहीं होते। ऐसे में फोन बार-बार नेटवर्क ढूंढ़ता है, जिससे बैटरी जल्दी खत्म होती है।
कानूनी कार्रवाई हो सकती है: भारत की DGCA और कई देशों की एविएशन अथॉरिटीज़ ने नियम बना रखे हैं कि उड़ान के दौरान मोबाइल फोन को एयरप्लेन मोड पर रखना अनिवार्य है। उल्लंघन पर जुर्माना भी लग सकता है।


फ्लाइट की सेफ्टी सबसे ऊपर
यह ज़रूरी नहीं कि एक चालू मोबाइल फोन ही हादसे का कारण बन जाए, लेकिन जब एक साथ सैकड़ों मोबाइल एक्टिव हों, तो इससे विमान के संचार तंत्र पर दबाव पड़ सकता है। खासकर टेक-ऑफ और लैंडिंग के दौरान यह ज्यादा संवेदनशील समय होता है। ऐसे में एयरप्लेन मोड ऑन करना एक एहतियाती कदम है जो फ्लाइट की सेफ्टी सुनिश्चित करता है।

क्या Wi-Fi चलाना सुरक्षित है?
अब कई आधुनिक विमानों में In-Flight WiFi की सुविधा होती है, लेकिन यह पूरी तरह विमान के सिस्टम से नियंत्रित होता है। ऐसे WiFi का इस्तेमाल आप एयरप्लेन मोड ऑन रखने के बाद कर सकते हैं। लेकिन मोबाइल नेटवर्क (जैसे 4G, 5G) और कॉलिंग को अब भी बंद रखना अनिवार्य होता है। एयरप्लेन मोड ऑन करना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि आपके और बाकी पैसेंजर्स की सुरक्षा से जुड़ा ज़रूरी कदम है। अगली बार जब फ्लाइट में बैठें और आपको एयरप्लेन मोड ऑन करने को कहा जाए — तो समझिए कि यह न केवल एक नियम है, बल्कि टेक्नोलॉजी की सुरक्षा का हिस्सा भी है।
 

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