Surya Grahan 2026: इस महीने लगने वाला है सदी का दूसरा सबसे लंबा सूर्य ग्रहण, जानें इस दौरान क्या करें, क्या न करें?

Edited By Updated: 16 Mar, 2026 04:21 PM

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Surya Grahan 2026: ज्योतिष और खगोल विज्ञान के नजरिए से साल 2026 बेहद उथल-पुथल और महत्वपूर्ण घटनाओं वाला साबित हो रहा है। 17 फरवरी को साल का पहला सूर्य ग्रहण बीतने के बाद, अब दुनिया एक और अद्भुत खगोलीय दृश्य की ओर बढ़ रही है। आगामी 12 अगस्त 2026 को...

Surya Grahan 2026: खगोल जगत में साल 2026 एक ऐसी तारीख दर्ज करने जा रहा है, जिसे 'सदी के सबसे महत्वपूर्ण ग्रहणों' में से एक माना जा रहा है। 12 अगस्त 2026 को लगने वाला यह पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) कई मायनों में अनूठा है। भारतीय पंचांग के अनुसार, यह ग्रहण हरियाली अमावस्या के दिन लग रहा है और इसके ठीक बाद रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया जाएगा। ज्योतिषियों का मानना है कि पर्वों के इतने करीब होने के कारण इस ग्रहण का आध्यात्मिक प्रभाव काफी गहरा होगा। हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है, इसलिए इस दौरान कई परंपरागत नियमों का पालन किया जाता है। ग्रहण के समय पूजा-पाठ, भोजन और दैनिक गतिविधियों को लेकर लोग सावधानी बरतते हैं। आईए जानते है इस दौरान क्या करें, क्या न करें?

भारत में समय और सूतक काल की स्थिति

भारतीय समयानुसार, यह ग्रहण 12 अगस्त 2026 की रात 9:04 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4:25 बजे समाप्त होगा।

-क्या भारत में दिखेगा? नहीं, चूंकि ग्रहण के समय भारत में रात होगी, इसलिए यह देश के किसी भी हिस्से में दिखाई नहीं देगा।
-सूतक काल का नियम: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल वहीं प्रभावी होता है जहाँ ग्रहण दिखाई देता है। चूंकि भारत में यह दृश्य नहीं होगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। मंदिरों के कपाट खुले रहेंगे और शुभ कार्यों पर कोई पाबंदी नहीं रहेगी।

दुनिया भर में कहां दिखेगा 'दिन में अंधेरा'

यह ग्रहण मुख्य रूप से उत्तरी गोलार्ध के देशों में अपनी छटा बिखेरेगा। आर्कटिक क्षेत्र, ग्रीनलैंड और आइसलैंड में यह पूर्ण रूप से दिखाई देगा। यूरोप के स्पेन जैसे देशों में तो यह नजारा इतना भव्य होगा कि कुछ मिनटों के लिए दिन में ही रात जैसा अंधेरा छा जाएगा। वैज्ञानिकों के अनुसार, स्पेन में यह पूर्ण सूर्य ग्रहण के रूप में दिखेगा, जबकि ब्रिटेन, फ्रांस और इटली में आंशिक ग्रहण का अनुभव होगा।

अध्यात्म और सावधानियां: क्या करें और क्या न करें?
भले ही भारत में यह अदृश्य है, लेकिन वैश्विक स्तर पर ऊर्जा के बदलाव को देखते हुए ज्योतिष शास्त्र कुछ सावधानियों की सलाह देता है:

मंत्र साधना: ग्रहण काल को मंत्र सिद्धि के लिए अचूक माना गया है। इस दौरान "ॐ सूर्याय नमः" या गायत्री मंत्र का मानसिक जाप करना शुभ होता है।
शुद्धिकरण: ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान और दान का विशेष महत्व है। तांबे की वस्तुओं या अनाज का दान करना फलदायी माना जाता है।
सावधानी: गर्भवती महिलाओं को नुकीली वस्तुओं से दूर रहने और सीधे सूर्य को न देखने की सलाह दी जाती है (उन क्षेत्रों में जहां ग्रहण दृश्य हो)।

सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें

  1. सूतक काल लगने के बाद किसी भी नए या शुभ कार्य की शुरुआत करने से बचें, जैसे विवाह, मुंडन या गृह प्रवेश।
  2. ग्रहण के समय देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श न करें और बाहरी रूप से पूजा-पाठ करने से परहेज रखें।
  3. इस दौरान मन ही मन गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र या सूर्य मंत्र का जप करना शुभ माना जाता है।
  4. ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें और स्नान के पानी में गंगाजल मिलाना पवित्र माना जाता है।
  5. इसके बाद घर और मंदिर की अच्छी तरह सफाई करें।
  6. देसी घी का दीपक जलाकर भगवान की पूजा-अर्चना करें।
  7. मंदिर में या जरूरतमंद लोगों को अन्न, धन या अन्य वस्तुओं का दान करें।
  8. सूतक काल शुरू होने से पहले भोजन या पेय पदार्थों में तुलसी के पत्ते डालकर रखना शुभ माना जाता है।

सूर्य ग्रहण के दौरान क्या न करें

  1. ग्रहण के समय नियमित पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान न करें।
  2. भगवान की मूर्तियों को स्पर्श करने से बचें।
  3. इस दौरान भोजन करने से परहेज करना चाहिए।
  4. चाकू, सुई या अन्य धारदार वस्तुओं का उपयोग न करें।
  5. सगाई, विवाह या अन्य मांगलिक कार्य न करें।
  6. तुलसी के पत्ते तोड़ना भी वर्जित माना जाता है।
  7. किसी से झगड़ा-बहस न करें।

सूर्य ग्रहण के समय किए जाने वाले मंत्र

  • ॐ घृणिं सूर्याय आदित्याय नमः

  • ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणाय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा

  • ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या गृहाणार्घ्य दिवाकरः

  • ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ

  • ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः

सूर्य ग्रहण के दौरान किए जाने वाले उपाय

ग्रहण के समय जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना पुण्यदायी माना जाता है। ग्रहण के समय तांबे के पात्र में जल भरकर उसमें लाल फूल डालें और ग्रहण समाप्त होने के बाद सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। घर के मंदिर की सफाई कर भगवान को ताजे फूल चढ़ाएं। ग्रहण के बाद मीठा भोजन बनाकर प्रसाद के रूप में बांटना भी शुभ माना जाता है।

खगोलीय महत्व: क्यों है यह खास?

खगोलविदों के लिए यह ग्रहण इसलिए विशेष है क्योंकि यह उत्तरी अटलांटिक और यूरोप के बड़े हिस्से को कवर करेगा। 12 अगस्त की यह घटना साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण है (पहला 17 फरवरी को लग चुका है)। इसके ठीक बाद 28 अगस्त 2026 को चंद्र ग्रहण भी लगने वाला है, जो इस महीने को खगोलीय घटनाओं का 'महाकुंभ' बनाता है।

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