Edited By Anu Malhotra,Updated: 17 Apr, 2026 09:31 AM

Women Reservation Act 2023 को लेकर केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी करते हुए इसे आधी रात से लागू कर दिया है। केंद्रीय विधि मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत कोटा देने वाला महिला आरक्षण अधिनियम 2023 गुरुवार से...
नई दिल्ली: Women Reservation Act 2023 को लेकर केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी करते हुए इसे आधी रात से लागू कर दिया है। केंद्रीय विधि मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत कोटा देने वाला महिला आरक्षण अधिनियम 2023 गुरुवार से लागू हो गया है। हालांकि, यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया है कि संसद में इसी कानून में संशोधन करके इसे 2029 में लागू करने पर चल रही बहस के बीच 2023 के अधिनियम को 16 अप्रैल से क्यों अधिसूचित किया गया।
एक अधिकारी ने कानून को लागू करने के लिए तकनीकी कारणों का हवाला दिया, लेकिन विस्तार से कुछ नहीं बताया। अधिकारी ने कहा कि अधिनियम लागू तो हो गया है, लेकिन वर्तमान सदन में आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता। अधिकारी ने आगे कहा कि अगली जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया जा सकता है।
अधिसूचना में लिखा था: "संविधान (एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 1 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार एतद्द्वारा उक्त अधिनियम के प्रावधानों के लागू होने की तिथि 16 अप्रैल, 2026 नियुक्त करती है।" सितंबर 2023 में, संसद ने विधायी निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पारित किया, जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के रूप में जाना जाता है।
इस अधिनियम में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान था। 2023 के कानून के तहत, आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं होगा, क्योंकि यह 2027 की जनगणना के बाद परिसीमन प्रक्रिया के पूरा होने से जुड़ा हुआ था। लोकसभा में वर्तमान में विचाराधीन तीनों विधेयक सरकार द्वारा इसलिए लाए गए थे ताकि 2029 में महिला कोटा लागू किया जा सके।
सियासी घमासान: किसने क्या कहा?
1. प्रधानमंत्री मोदी की अपील:
पीएम मोदी ने विपक्ष से इसे राजनीति के तराजू में न तौलने का आग्रह किया है। उन्होंने साफ कहा कि देश की नारी शक्ति केवल सरकार के फैसले को ही नहीं, बल्कि विपक्ष की 'नीयत' को भी देख रही है। विकसित भारत के लिए महिलाओं का साथ अनिवार्य है।
2. सरकार का पक्ष (किरेन रिजिजू):
संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार इस बिल का श्रेय नहीं लेना चाहती। उन्होंने बताया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों से लगातार समर्थन मांगा गया है ताकि बिना किसी भ्रम के महिलाओं को उनका अधिकार मिले।
3. प्रियंका गांधी का हमला:
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जनगणना और परिसीमन की शर्तों के पीछे राजनीति छिपी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि महिलाएं अब बहकाने वाले वादों को समझने लगी हैं, इसलिए सरकार को सीधे तौर पर आरक्षण लागू करना चाहिए। वर्तमान लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या में तुरंत कोई बदलाव नहीं होगा। 2029 के चुनावों में देश की सूरत बदल सकती है, जब लोकसभा की एक-तिहाई सीटें सिर्फ महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित होंगी।