Edited By Anu Malhotra,Updated: 17 Apr, 2026 11:36 AM

Women Reservation Act 2023: लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करने वाला महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 बृहस्पतिवार को लागू कर दिया गया ताकि संसद में चर्चा किए जा रहे प्रस्तावित संशोधन को क्रियान्वित किया जा सके।...
Women Reservation Act 2023: लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करने वाला महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 बृहस्पतिवार को लागू कर दिया गया ताकि संसद में चर्चा किए जा रहे प्रस्तावित संशोधन को क्रियान्वित किया जा सके। एक अधिकारी ने बताया कि इस कानून को लागू करना आवश्यक था, क्योंकि इसके बिना प्रस्तावित संशोधन प्रभावी नहीं हो सकता था। संविधान संशोधन विधेयक कानून तो बन गया था, लेकिन सरकार द्वारा इसे लागू नहीं किए जाने के कारण यह संविधान का हिस्सा नहीं बन पाया था। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यदि कोई कानून लागू ही नहीं है तो उसके प्रस्तावित संशोधन को कैसे लागू किया जा सकता है।
इसी कारण इसे 16 अप्रैल से प्रभावी किया गया। वर्ष 2023 के इस अधिनियम को संसद में इसी कानून में संशोधन पर चल रही बहस के बीच 16 अप्रैल से अधिसूचित किया गया। एक अन्य अधिकारी ने वीरवार रात ''तकनीकी कारणों'' का हवाला देते हुए इसे लागू करने की बात कही थी।
हालांकि, उन्होंने विस्तार से कुछ नहीं बताया था। अधिकारी ने यह भी कहा था कि अधिनियम लागू होने के बावजूद वर्तमान लोकसभा में आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता। अधिकारी के अनुसार, महिलाओं के लिए आरक्षण अगली जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू किया जा सकेगा। अधिसूचना में कहा गया है: ''संविधान (106 संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 1 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार 16 अप्रैल, 2026 को वह तिथि नियुक्त करती है, जिस दिन से उक्त अधिनियम के प्रावधान प्रभावी होंगे।''
सितंबर 2023 में संसद ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पारित किया था, जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के नाम से जाना जाता है, जो विधायी निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अधिनियम में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों के आरक्षण का प्रावधान किया गया है। इस कानून के तहत, यह आरक्षण 2027 की जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने से पहले लागू नहीं किया जा सकता था, जिसके कारण इसके 2034 से पहले लागू होने की संभावना नहीं थी। वर्तमान में लोकसभा में चर्चा के लिए लाए गए तीन विधेयक - 'संविधान (131सवां संशोधन) विधेयक, 2026', 'परिसीमन विधेयक, 2026' और 'केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026' सरकार द्वारा इस उद्देश्य से प्रस्तुत किए गए हैं कि महिलाओं के लिए आरक्षण 2029 में लागू किया जा सके।
सियासी घमासान: किसने क्या कहा?
1. प्रधानमंत्री मोदी की अपील:
पीएम मोदी ने विपक्ष से इसे राजनीति के तराजू में न तौलने का आग्रह किया है। उन्होंने साफ कहा कि देश की नारी शक्ति केवल सरकार के फैसले को ही नहीं, बल्कि विपक्ष की 'नीयत' को भी देख रही है। विकसित भारत के लिए महिलाओं का साथ अनिवार्य है।
2. सरकार का पक्ष (किरेन रिजिजू):
संसदीय कार्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार इस बिल का श्रेय नहीं लेना चाहती। उन्होंने बताया कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों से लगातार समर्थन मांगा गया है ताकि बिना किसी भ्रम के महिलाओं को उनका अधिकार मिले।
3. प्रियंका गांधी का हमला:
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जनगणना और परिसीमन की शर्तों के पीछे राजनीति छिपी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि महिलाएं अब बहकाने वाले वादों को समझने लगी हैं, इसलिए सरकार को सीधे तौर पर आरक्षण लागू करना चाहिए। वर्तमान लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या में तुरंत कोई बदलाव नहीं होगा। 2029 के चुनावों में देश की सूरत बदल सकती है, जब लोकसभा की एक-तिहाई सीटें सिर्फ महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित होंगी।